MP में दोबारा लॉकडाउन को लेकर क्या बोले गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा

MP में दोबारा लॉकडाउन को लेकर क्या बोले गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा

भोपाल।

एमपी (MP) में लॉकडाउन (Lock Down) को लेकर चल रही अफवाहों पर गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा (Home Minister Narottam Mishra) का बडा बयान सामने आया है।गृहमंत्री ने साफ कहा है कि फ़िलहाल लॉकडाउन को लेकर कोई प्लानिंग नहीं है, मप्र में स्थाई लॉकडाउन को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं है।अफवाहों पर ध्यान ना दे।

आज मीडिया से चर्चा के दौराम मिश्रा ने कहा कि लॉकडाउन को लेकर कोई भी शासन स्तर पर लंबित नहीं है,स्थानीय स्तर पर क्राईसिस मैनेजमेंट कमेटी की अनुशंसा पर आगे कोई फैसला लिया जाएगा।फ़िलहाल लॉकडाउन को लेकर कोई प्लानिंग नहीं है, मप्र में स्थाई लॉकडाउन को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं है।  वर्चुअल रैली को लेकर मिश्रा ने कहा कि कोई भी रणनीति को लेकर सवाल इसलिए नहीं है क्योंकि वातावरण बीजेपी के पक्ष में है।

कांग्रेस के ट्वीट पर गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस हम पर ध्यान कम दे और अपना ध्यान रखें। क्या पता अगली बरसात यह दीवार भी ढह जाए। 20 जुलाई से शुरू हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र पर संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा किपहले दिन स्वर्गीय मनोहर ऊँटवाल को श्रद्धांजलि देगें,दूसरे दिन बजट लाएगें। चुनाव को लेकर रणनीति का सवाल इसलिए भी नहीं है, क्योंकि पीएम का आभामंडल, सीएम शिवराज के काम और कांग्रेस की 15 महीने की सरकार के दौरान जनता और युवाओं के साथ धोखा किया गया है, इस सबका समिश्रण ही वातावरण का निर्माण कर रहा है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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