कोरोना काल में मानसिक अवसाद से कैसे निपटें, डॉ. राहुल शर्मा ने लाइव बताया, देखिये वीडियो

कोरोना काल में मानसिक अवसाद से कैसे निपटें, डॉ. राहुल शर्मा ने लाइव बताया, देखिये वीडियो

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट
कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से मानसिक अवसाद के मामले भी तेजी से बढ़ने लगे हैं। लॉकडाउन और फैलते संक्रमण के बीच घर में रहने के बाद आज के लोग एक मानसिक अवसाद की गति में चले गए हैं। एक तरफ जहां उनकी मानसिक स्थिति पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। वहीं दूसरी तरफ लोग एक दूसरे से कटते भी जा रहे हैं। कोरोना काल और मानसिक अवसाद के इसी विषय पर एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ के फेसबुक पेज पर रविवार को एक सार्थक चर्चा हुई| जिसमे क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ राहुल शर्मा ने मानसिक तनाव, डर, बेचैनी, अवसाद, चिड़चिड़ापन आदि मनोविकार से संबंधित समस्या को लेकर अहम् जानकारी दी| डॉ शर्मा के साथ एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ से रविंद्र सिंह राजपूत जुड़े रहे| डॉ शर्मा ने लाइव रहते हुए लोगों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए|

बता दें कि भोपाल के जेपी हॉस्पिटल में क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट रहे डॉ. राहुल शर्मा राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत मानसिक स्वास्थ्य केन्द्र सीहोर के अलावा हफ्ते में कुछ दिन हमीदिया अस्पताल में भी सेवा देते थे।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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