पति दिनभर करते हैं फरमाइश,नहीं बंटाते काम में हाथ,महिला आयोग में शिकायतों का ढेर

पति दिनभर करते हैं फरमाइश,नहीं बंटाते काम में हाथ,महिला आयोग में शिकायतों का ढेर

भोपाल

कोरोना के आतंक से हर व्यक्ति परेशान है। लेकिन कोरोना के कारण हुए इस लॉकडॉउन का सबसे ज्यादा असर महिलाओं पर पड़ रहा है और यह असर पॉजिटिव नहीं नेगेटिव है। महिलाओं की जिंदगी इस लॉकडॉउन से बहुत प्रभावित हुई है, पति के साथ सारे घरवाले अब समय घर पर हैं और पूरे समय किसी न किसी की फरमाइशें चलती रहती है। हालत ये हो गई है कि ज्यादातर घरों में महिलाओं का पूरा समय घर के काम और किचन में फरमाइश पूरी करते निकल रहा है।

अगर आप इस बात को गंभीरता से नहीं ले रहे तो एक बार फिर से सोचिये, लॉकडाउन के दौरान पिछले दो महीने में गृहणियों की 200 से अधिक शिकायतें महिला आयोग तक पहुंची हैं और इनमें से अधिकांश शिकायतें ये हैं कि पति ने उन्हें परेशान कर रखा है। पति पूरा दिन फोन पर बातें करते रहते हैं, लैपटॉप पर काम में लगे रहते हैं और दिन भर उनकी नई नई फरमाइशें चलती रहती है। इस दौरान अगर पत्नी कुछ मदद करने को कह दें तो काम का हवाला देकर जरा भी हाथ नहीं बंटाते। उसपर भी दिनभर काम में लगी पत्नी की परेशान को बिल्कुल नहीं समझते हैं और कभी किसी चीज की फरमाइश करते हैं तो कभी किसी और चीज की।

इतनी तादाद में मिली शिकायतों के आधार पर पतियों का गैर जिम्मेदाराना रवैया साफ सामने आ गया है। इसी आधार पर कई महिलाएं शिकायतें दर्ज करा रही हैं। महिला आयोग में प्रदेश के ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड अंचल से ऐसी शिकायतें ज्यादा सामने आई हैं और ज्यादातर शिकायतें ई-मेल के जरिए आ रही हैं। महिला आयोग के पास पहले से ही करीब 10 हजार केस शिकायतें पेंडिंग हैं ऐसे में इन नई शिकायतों का निपटारा कब होगा ये देखने वाली बात है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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