सियासत में इस पोस्टर से बवाल, जयवर्धन सिंह को बताया ‘भावी मुख्यमंत्री’

सियासत में इस पोस्टर से बवाल, जयवर्धन सिंह को बताया ‘भावी मुख्यमंत्री’

भोपाल| पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) के पुत्र और पूर्व कैबिनेट मंत्री जयवर्धन सिंह (Jaivardhan Singh) के जन्मदिन पर लगाया एक पोस्टर चर्चा में आ गया है| जिसमे जयवर्धन को ‘भावी मुख्यमंत्री’ बताया है| प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों के बंटवारे को लेकर चल रही सियासत के बीच जयवर्धन के इस पोस्टर सियासी गलियारों में बवाल मच गया है|

पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह के जन्मदिन पर उनके समर्थक सोशल मीडिया पर बधाई सन्देश दे रहे हैं, साथ ही पोस्टर भी शेयर कर रहे हैं| इस बीच राजधानी भोपाल के एमपी नगर के मुख्य चौराहे पर लगा यह पोस्टर अचानक सियासत की सुर्खिया बन गया है| यह पोस्टर युथ कांग्रेस द्वारा लगाया गया है, जिसमे लिखा है ‘मध्य प्रदेश के ‘भावी मुख्यमंत्री’ जयवर्धन सिंह को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं, प्रदेश की शक्ति, कांग्रेस की शक्ति, युवा शक्ति’|

राजनीतिक जानकार बताते हैं गुटों में बंटी कांग्रेस में ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में जाने के बाद दिग्विजय सिंह खेमा सक्रिय हो गया है| कमलनाथ की जगह जयवर्धन सिंह को मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट किया जा रहा है| हालाँकि इस पोस्टर से बवाल के बाद इसे हटा लिया गया है| लेकिन सोशल मीडिया पर यह पोस्टर वायरल है और भाजपा इसको लेकर कांग्रेस पर निशाना साध रही है|

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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