आज हम अपना संविधान दिवस मना रहे हैं। आज ही के दिन 1949 में भारत की संविधान सभा द्वारा भारत के संविधान को अपनाया गया था और उसी की याद में हम हर साल ये दिवस मनाते हैं। भारत सरकार ने साल 2015 में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की 125वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में इस तारीख को आधिकारिक रूप से संविधान दिवस घोषित किया था।
सीएम डॉ. मोहन यादव ने आज के दिन सभी नागरिकों को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है कि “आप सभी को ‘संविधान दिवस’ की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। हमारा पवित्र संविधान भारत की आत्मा, लोकतंत्र की सबसे मजबूत आधारशिला और प्रत्येक नागरिक के सम्मान, अधिकार व समान अवसरों का संवाहक है। हम सभी को सदा याद रखना चाहिए कि संविधान केवल अधिकार नहीं देता है, बल्कि उसमें महान कर्तव्यों व अनुशासन की प्रेरणा भी है। आइए, ‘विकसित भारत’ के लिए संविधान के आदर्शों एवं मूल्यों पर चलने के लिए संकल्पित हों।”
हम मना रहे हैं अपना संविधान दिवस
26 नवंबर 1949 को भारत की संविधान सभा ने औपचारिक रूप से भारत के संविधान को अपनाया था। 26 जनवरी 1950 को देश में संविधान लागू हुआ, जिसे गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। संविधान दिवस मनाने का उद्देश्य नागरिकों के बीच संवैधानिक मूल्यों को बढ़ावा देना और संविधान के महत्व का प्रसार करना है।
दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान
भारतीय संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। इसे सबसे विस्तृत और आधुनिक संविधानों में से एक माना जाता है। यह देश को संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित करता है तथा प्रत्येक नागरिक को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की गारंटी देता है। संविधान ही वह ढांचा है जिसके आधार पर सरकारें बनती हैं, अधिकार संरक्षित रहते हैं और हर नागरिक को न्याय तक पहुंच सुनिश्चित होती है।
संविधान देता है अधिकार, कराता है कर्तव्यों का बोध
संविधान नागरिकों को मौलिक अधिकार देता है जिसमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता का अधिकार और जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा अधिकार शामिल है। साथ ही यह नागरिकों को मौलिक कर्तव्य भी सौंपता है जिनमें संविधान का सम्मान, राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास शामिल है।
संविधान दिवस हमें याद दिलाता है कि लोकतंत्र सिर्फ चुनावों से नहीं चलता, बल्कि उन संवैधानिक आदर्शों से संचालित होता है जो अधिकार भी देते हैं और कर्तव्य भी सौंपते हैं। यह दिन हर नागरिक को संविधान से जुड़ने, उसे समझने और उसके मूल्यों को व्यवहार में उतारने का संकल्प याद दिलाता है।





