भारतीय वन सेवा अधिकारियों के तबादले, यहां देखें किसको कहां मिली जगह

भारतीय वन सेवा अधिकारियों के तबादले, यहां देखें किसको कहां मिली जगह

भोपाल।

मध्यप्रदेश में तबादलों का दौर जारी है।आए दिन किसी ना किसी विभाग के तबादलों की लिस्ट जारी हो रही है। राज्य शासन ने भारतीय वन सेवा के 25 अधिकारियों को स्थानान्तरित करते हुए नवीन पद्स्थापना आदेश जारी किए हैं।

यहां देखें किसे-कहां भेजा

वन संरक्षक सीधी श्री बृजेन्द्र झा को मुरैना और उप वन संरक्षक श्री अशोक कुमार को उप-संचालक संजय टाइगर रिजर्व, सीधी पदस्थ किया गया है।वन मंडलाधिकारियों में श्री संजीव झा को छतरपुर वन मंडल, श्रीमती राखी नंदा को राज्य वन विकास निगम, श्री एस.के.एस. तिवारी को छिंदवाडा, श्री एन.एस. यादव को सिवनी, डॉ. अनुपम सहाय को बड़वानी, श्री गौरव चौधरी को दक्षिण बालाघाट, श्री बृजेन्द्र श्रीवास्तव को उत्तर बालाघाट, श्री संजय कुमार चौहान को मंदसौर, श्री के.एस. पट्टा को डिंडौरी और श्री एम.पी. सिंह को सीधी वन मंडल में स्थानान्तरित किया गया है।

वनमंडलाधिकारी श्री एम.एल. हरित को झाबुआ वन मंडल, श्री टी.एस. सूलिया को इंदौर, श्री अनुराग कुमार को दक्षिण बालाघाट, श्री ए.ए. अंसारी को खंडवा, श्री नरेश दोहरे को हरदा, श्री शिवाजी त्रिपाठी को उप वन संरक्षक प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख कार्यालय भोपाल, श्री प्रकाश कुमार वर्मा को पालपुर कूनो, श्री पी.डी. ग्रेबियाल को दक्षिण बैतूल, श्री राजवीर सिंह विदिशा, श्री महेन्द्र सिंह उइके को दक्षिण सागर, श्री ग्रजेश कुमार बरकडे को उप-संचालक कान्हा टाइगर रिजर्व मंडला, श्री सियाराम सिंह मेहता को सेंधवा और श्री कमल सिंह मसराम को राज्य वन अनुसंधान संस्थान जबलपुर स्थानान्तरित किया गया है।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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