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साइंस हाउस स्कैम! फर्जी टेस्ट, ओवरबिलिंग और 943 करोड़ का भुगतान, जयवर्धन सिंह ने पूछा “कौन है यह कंपनी जिसके आगे पूरी सरकार दंडवत”

Written by:Shruty Kushwaha
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कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग ने भोपाल की साइंस हाउस मेडिकल प्राइवेट लिमिटेड को चार वर्षों में 12.38 करोड़ जांचों के नाम करोड़ों का भुगतान किया, जबकि वास्तविक क्षमता और दरों के हिसाब से यह आंकड़ा असंभव है। उन्होंने विधानसभा में इसे लेकर सवाल पूछा और स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी चौंकाने वाली है।
साइंस हाउस स्कैम! फर्जी टेस्ट, ओवरबिलिंग और 943 करोड़ का भुगतान, जयवर्धन सिंह ने पूछा “कौन है यह कंपनी जिसके आगे पूरी सरकार दंडवत”

मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में 943 करोड़ रुपये के पैथोलॉजी घोटाले के आरोप ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि भोपाल स्थित साइंस हाउस मेडिकल प्राइवेट लिमिटेड को सरकारी अस्पतालों में परीक्षणों के बदले अत्यधिक और अनुचित भुगतान किया गया।

उन्होंने कहा कि चार साल में कंपनी को  12.38 करोड़ पैथोलॉजी टेस्ट कराने के नाम पर  943 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जबकि वास्तविक क्षमता और सामान्य दरों की तुलना में यह भुगतान कई गुना अधिक है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इतने बड़े पैमाने पर टेस्ट किया जाना व्यावहारिक रूप से असंभव है और आंकड़ों में गंभीर हेरफेर किया गया है।

जयवर्धन सिंह ने विधानसभा में पूछा सवाल

जयवर्धन सिंह ने विधानसभा में इस मुद्दे को सवाल किया जिसके जवाब में स्वास्थ्य विभाग ने 68,000 पन्नों की रिपोर्ट पेन ड्राइव में प्रस्तुत की है। रिपोर्ट में भुगतान और कई अनियमितताओं का उल्लेख है, लेकिन आगे की किसी कार्रवाई की जानकारी नहीं है। जयवर्धन सिंह ने इसे “आँखों में धूल झोंकने” वाला कदम बताया है। उन्होंने कहा कि कई टेस्ट बिना मरीजों की जरूरत के कराए गए, फर्जी मरीज दिखाए गए और हजारों-लाखों रिपोर्टें आज तक जारी ही नहीं हुईं, फिर भी पूरा बिल पास कर दिया गया।

साइंस हाउस को अनुचित ढंग से लाभ पहुंचाने का आरोप

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया को साइंस हाउस कंपनी के पक्ष में प्रभावित किया गया। छह निविदाकर्ताओं में से तीन को जानबूझकर अयोग्य घोषित किया गया। शेष दो कंपनियां एक ही मालिक से जुड़ी थीं और दोनों कंपनियों के लिए जांचों के अलग-अलग रेट तय किए गए। पहले टेंडर में कम दर होने के बावजूद उसे रद्द कर दिया गया, दूसरे टेंडर में ढाई गुना महंगी दरों पर ठेका दिया गया। जयवर्धन सिंह ने कहा कि यह सब ओवरबिलिंग को वैध दिखाने के लिए किया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में बिना जरूरत के टेस्ट कराए गए, फर्जी मरीजों के नाम पर बिलिंग हुई और कई टेस्ट की रिपोर्टें कभी जारीनहीं की गई। उन्होंने कहा कि यह घोटाला सिर्फ आर्थिक अनियमितता नहीं बल्कि जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। जयवर्धन सिंह ने सवाल उठाया कि आयकर विभाग और ईडी द्वारा कंपनी पर छापेमारी के बाद भी उसे एक वर्ष का अनुबंध विस्तार कैसे दे दिया गया। उन्होंने पूछा है कि “कौन है यह साइंस हाउस, जिसके लिए पूरा सिस्टम दंडवत हो गया है?” कांग्रेस ने इस पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच या न्यायिक जांच की मांग की है।

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Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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