मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने ग्वालियर सड़क हादसे में 16 लोगों की मौत को प्रशासनिक विफलता का परिणाम बताया है। उन्होंने राज्य सरकार से मृतकों के परिवार को 25 लाख रुपये मुआवजा और हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
बुधवार को उन्होंने भोपाल एम्स पहुंचकर हादसे में घायल श्रद्धालुओं से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य एवं उपचार की जानकारी ली। उन्होंने पीड़ितों के परिजनों से भी मुलाकात की। परिजनों ने उन्हें हादसे की परिस्थितियों और घटना से जुड़ी जानकारी दी।
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सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
जीतू पटवारी ने हादसे में लोगों की मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि इस दुर्घटना ने कई परिवारों को ऐसी पीड़ा दी है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि गंभीर रूप से घायल लोगों को बेहतर उपचार के लिए एयरलिफ्ट करना पड़ा। प्रदेश में लगातार हो रही दुर्घटनाएं पुलिस, प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने कहा कि समय रहते उचित इंतजाम और सतर्कता बरती जाती तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
दोषियों पर कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि हादसे के बाद सिर्फ सहायता राशि घोषित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
उन्होंने मध्यप्रदेश में हाल के दिनों में हुई विभिन्न घटनाओं का उल्लेख करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत, बालाघाट हादसे, इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों, सागर के शराब कांड, ग्वालियर सड़क दुर्घटना और बैतूल में खाटू श्याम दर्शन के लिए जा रहे परिवार के साथ हुई दुर्घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है।
घायलों के इलाज का खर्च उठाए सरकार
जीतू पटवारी ने मांग की कि ग्वालियर हादसे में मृतकों के प्रत्येक परिवार को कम से कम 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए और सभी घायलों के इलाज का पूरा खर्च सरकार वहन करे। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों को न्याय, समुचित चिकित्सा और पर्याप्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने सड़क सुरक्षा, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
