BEO और क्लर्क को लोकायुक्त पुलिस ने रिश्वत लेते पकड़ा, छात्रावास अधीक्षक का निलंबन अवधि वेतन बिल पास करने मांगी घूस

लोकायुक्त पुलिस इंदौर ने झाबुआ जिले में पदस्थ विकास खंड शिक्षा अधिकारी को उनके कार्यालय में ही पदस्थ क्लर्क के साथ रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है, आरोपियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
Jhabua BEO arrested accepting bribe

Jhabua BEO arrested accepting bribe

लोकायुक्त पुलिस इंदौर ने झाबुआ जिले के विकासखंड शिक्षा अधिकारी को उनके कार्यालय के क्लर्क के साथ 10000/- रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है, आरोपी शासकीय सेवक एक छात्रावास अधीक्षक से उसके निलंबन अवधि के वेतन का बिल जारी करने एक बदले रिश्वत ले रहे थे।

लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक इंदौर कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक शासकीय बालक छात्रावास सेमलिया बड़ी झाबुआ के अधीक्षक धूम सिंह सिंगाड़ ने एक शिकायती आवेदन दिया था जिसमें विकास खंड शिक्षा अधिकारी झाबुआ और वहां पदस्थ क्लर्क पर सिश्वत मांगने के आरोप लगाये गए थे।

वेतन बिल जारी करने BEO ने क्लर्क के जरिये मांगी रिश्वत  

छात्रावास अधीक्षक ने आवेदन में बताया कि उनके निलंबन अवधि का 8 महीने का वेतन 2,30,000/- बकाया है जिसे जारी करने के लिए झाबुआ बीईओ कार्यालय द्वारा उन्हें परेशान किया जा रहा है वहां पदस्थ सहायक ग्रेड 3 पवन सिंह बिलवाल 10,000 रुपये रिश्वत मांग रहा है उसका कहना है कि BEO साहब पैसा लेकर ही बिल पर हस्ताक्षर करेंगे।

लोकायुक्त एसपी राजेश सहाय के निर्देश पर आवेदन में लगाये गए आरोपों का सत्यापन कराया गया जिसमें रिश्वत मांगने का आरोप सही निकला, जिसके बाद ट्रैप प्लान की गई, और आज निर्धारित समय पर लोकायुक्त पुलिस इंदौर की टीम झाबुआ बीईओ कार्यालय पहुंच गई।

10 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा 

लोकायुक्त टीम ने छात्रावास अधीक्षक  धूम सिंह को रिश्वत की राशि लेकर बीईओ कार्यालय में भेजा जहाँ बीईओ जय नारायण बैरागी  ने रिश्वत की राशि 10000/-  रुपये कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड 3 पवन सिंह बिलवाल को देने के लिए कहा, जैसे ही उसने पैसे क्लर्क को दिए लोकायुक्त पुलिस ने दोनों को रंगे हाथ पकड़ लिया। लोकायुक्त ने आरोपियों के विरुद्ध  भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मामला पंजीबद्ध कर लिया है।

Atul Saxena
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पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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