मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने केंद्र सरकार द्वारा 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह कदम किसानों की भावनाओं को समझते हुए लिया गया एक सकारात्मक निर्णय है, जिससे कृषि क्षेत्र को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार भी व्यक्त किया।
इसी के साथ उन्होंने शिवराज सिंह चौहान से सवाल किया है कि मध्यप्रदेश में कितनी फसलें वास्तव में MSP पर खरीदी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि घोषित एमएसपी का लाभ किसानों तक पहुंच रहा है या नहीं, और यदि नहीं पहुंच रहा तो इसका भौतिक सत्यापन किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की है कि एमएसपी से कम कीमत पर खरीद के खिलाफ कानून बनाया जाए।
सरकार ने किसानों को दी राहत
केंद्र सरकार द्वारा 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की गई है। अब धान की नई एमएसपी 2441 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है, जो पिछली दर से 72 रुपये अधिक है। इसी तरह तुअर दाल की एमएसपी में 450 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। सरकार द्वारा जिन फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य में संशोधन किया गया है, उनमें प्रमुख रूप से धान, तुअर, उड़द, मूंग, मक्का, बाजरा, ज्वार, रागी, कपास, मूंगफली, सोयाबीन और सूरजमुखी जैसी फसलें शामिल हैं। इसके अलावा कुछ अन्य मोटे अनाज और दलहन फसलों के लिए भी नई दरें तय की गई हैं।
जीतू पटवारी ने किए सवाल
इस फैसले की प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सराहना की है। लेकिन साथ ही उन्होंने इस व्यवस्था के जमीनी क्रियान्वयन और किसानों को वास्तविक लाभ मिलने पर सवाल भी किए हैं। उन्होंने पूछा कि असली मुद्दा यह है कि क्या यह लाभ वास्तव में किसानों तक पहुंच रहा है या केवल कागज़ों तक सीमित रह जाएगा। कांग्रेस नेता ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान से सवाल किया कि मध्यप्रदेश में कौन सी फसलें वास्तव में MSP पर खरीदी जा रही हैं और क्या इसका भौतिक सत्यापन किया जाएगा।
एमएसपी से कम कीमत पर खरीद के खिलाफ कानून बनाने की मांग
जीतू पटवारी ने कहा कि सिर्फ एमएसपी बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, जब तक यह सुनिश्चित न किया जाए कि किसानों की उपज वास्तव में निर्धारित मूल्य पर खरीदी जाए। उन्होंने मांग की है कि यदि बीजेपी सरकार किसानों के हित में गंभीर है तो ऐसा कानून बनाया जाए जिसमें MSP से कम कीमत पर फसल खरीदना पूरी तरह प्रतिबंधित हो, ताकि किसानों को उनकी उपज का न्यूनतम सुनिश्चित मूल्य मिल सके।






