जीतू पटवारी ने सीएम डॉ. मोहन यादव को लिखा पत्र, कैग रिपोर्ट में मध्यप्रदेश के आंकड़ों पर जताई चिंता, श्वेत पत्र जारी करने की मांग

उन्होंने प्रदेश में मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं और पोषण योजनाओं की स्थिति पर चिंता जताते हुए सरकार से रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्तियां करने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की।
Jitu Patwari

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मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर राज्य में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कैग रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर चिंताजनक है, जबकि हजारों गांव अब भी आंगनवाड़ी सेवाओं से वंचित हैं।

पत्र में कहा गया कि लाखों बच्चे और गर्भवती महिलाएं पोषण योजनाओं का लाभ नहीं पा रहे हैं तथा कई महत्वपूर्ण पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। कांग्रेस नेता ने सीएम से कहा कि आपकी सरकार दावा करती है कि मध्यप्रदेश विकास की दौड़ में आगे है, लेकिन कैग कह रहा है कि माताओं और बच्चों की सुरक्षा की दौड़ में मध्यप्रदेश सबसे पीछे खड़ा है।

जीतू पटवारी में मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखे पत्र में कहा है कि सरकार विकास के दावों के लिए विज्ञापनों का सहारा ले रही है, जबकि कैग की रिपोर्ट प्रदेश की वास्तविक तस्वीर सामने रखती है। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आंगनवाड़ी सुविधाओं का विस्तार, पोषण योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं हो सकी। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि माताओं और नवजातों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।

श्वेत पत्र जारी करने की मांग

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से कैग रिपोर्ट पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। इसी के साथ लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई करने, सभी रिक्त पदों पर तत्काल नियुक्तियां करने, प्रत्येक आंगनवाड़ी को मूलभूत सुविधाओं से सुसज्जित करने, पोषण से वंचित रहे 25 लाख से अधिक हितग्राहियों के मामले में जवाबदेही तय करने तथा मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए जिला-वार कार्ययोजना सार्वजनिक करने की मांग भी की गई है।

पत्र के अंत में जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए लिखा कि “संकुचित सोच और बदले की राजनीतिक प्रवृत्ति में अच्छा-बुरा फिर भी संभल जाता है, लेकिन एक मां की मौत और एक बच्चे की असमय बुझी सांस कभी वापस नहीं आती।” उन्होंने सवाल किया कि सरकार के लिए अधिक महत्वपूर्ण क्या है विज्ञापनों की चमक या नवजातों की सुरक्षा।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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