कमलनाथ का भाजपा पर वार, ‘इन्हें जनसेवा नहीं ,सत्ता की भूख है’

कमलनाथ का भाजपा पर वार, ‘इन्हें जनसेवा नहीं ,सत्ता की भूख है’

भोपाल| कोरोना संकट (Corona Crisis) के बीच भाजपा (BJP) की चुनावी तैयारियों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ (Kamalnath) ने हमला बोला है| पूर्व सीएम ने ट्वीट कर कहा आज आवश्यकता है सभी को मिलकर कोरोना महामारी से लड़ने की, लेकिन तैयारियाँ की जा रही है चुनाव लड़ने की, यह है इनकी संवेदनशीलता|

कमलनाथ ने ट्वीट कर कहा ‘कितना शर्मनाक है आज आवश्यकता है कोरोना प्रभावित इलाक़ों में एवं प्रदेश के मार्गों व सीमाओं पर जाकर भूखे प्यासे मज़दूरों से मिलकर उनका दर्द जानने की, लेकिन जा रहे है अपने कार्यालय उपचुनाव की तैयारियों के लिये,चुनाव जीतने की रणनीति बनाने के लिये,लोगों का दलबदल करवाने के लिये ?

पूर्व सीएम ने अपने अगले ट्वीट में कहा ‘आज आवश्यकता है इस महामारी के प्रदेश में बढ़ते प्रकोप को देखते हुए केन्द्र सरकार से बात कर प्रदेश में टेस्टिंग किट की कमी दूर करने की , टेस्टिंग के लिये निजी लेब को ज़्यादा से ज़्यादा अनुमति दिलवाने की , वेंटिलेटर व पीपीई किट की कमी को दूर करने की लेकिन केन्द्र सरकार व उसके मंत्रियो से इस महामारी में भी बात की जा रही है उपचुनावो को जीतने के लिये “एक्सप्रेस वे “ के भूमिपूजन की….?

उन्होंने कहा ‘आज आवश्यकता है सभी को मिलकर कोरोना महामारी से लड़ने की, लेकिन तैयारियाँ की जा रही है चुनाव लड़ने की , इस महामारी में भी पद बाँटे जा रहे है , जवाबदारी कोरोना से निपटने की नहीं , उपचुनाव जिताने की दी जा रही है ?
यह है इनकी संवेदनशीलता…? इन्हें जनसेवा नहीं ,सत्ता की भूख है।इन्हें कोरोना से प्रदेशवासियो को नहीं बचाना है , इन्हें पहले खुद की सरकार को बचाना है।इनकी प्राथमिकता जनता नहीं सत्ता लोलुपता है। बेचारी जनता कोरोना से लड़ रही है और ये पद व टिकट के लिये लड़ रहे है’|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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