कमलनाथ ने की इंदौर की घटना की निंदा, कहा- “ऐसा करने वाले मानवता के दुश्मन”

कमलनाथ ने की इंदौर की घटना की निंदा, कहा- “ऐसा करने वाले मानवता के दुश्मन”

भोपाल। इंदौर में स्वास्थ्य कर्मी एवं पुलिस प्रशासन पर हुए हमले पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट करके उसकी निंदा की है। उन्होने कहा कि इंदौर के रानीपुरा और टाटापट्टी बाखल में स्वास्थ्य कर्मचारियों के साथ हुए दुर्व्यवहार व पथराव की घटना बेहद दु:खद व निंदनीय है। ऐसा कृत्य करने वाले समाज, इंसानियत एवं मानवता के दुश्मन हैं।

अपने एक और ट्वीट में कमलनाथ ने कहा कि इस संकट की घड़ी में सुरक्षाकर्मी एवं डॉक्टर अपनी जान को जोखिम में डालकर जनता की सुरक्षा कर रहे हैं एवं अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं। हमें सुरक्षाकर्मी एवं प्रशासन के अधिकारियों का आगे आकर सहयोग करना चाहिए एवं उनके जज्बे को सलाम करना चाहिए, ना कि उनके ऊपर पत्थर बरसाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जनता की ऐसी घटना से प्रदेश व शहर एवं देश शर्मसार हो जाता है। कमलनाथ ने कहा कि प्रदेश प्रशासन को डॉक्टर एवं स्वास्थ्य कर्मचारियों की सुरक्षा का इंतजाम करना चाहिये साथ ही ऐसी घटनाओं को अंजाम देने वाले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

इसी के साथ प्रदेशवासियों के कल्याण एवं इस संकट की घड़ी से बचाव के लिए पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ रामनवमी के दिन यज्ञ कर जनता के बेहतर स्वास्थ्य और कल्याण की कामना की है। समस्त देशवासियों को रामनवमी की बधाई देते हुए उन्होने कहा कि इस पर्व पर मैं सभी सामाजिक संस्थाओं, संगठनों एवं गणमान्यजनों से अनुरोध करता हूं कि संकट की इस घड़ी में गरीब मजदूर वर्ग और जरूरतमंदों की हरसंभव सहायता करें।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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