कमलनाथ ने अपनी खुली चिट्ठी में अब कांग्रेस नेता-कार्यकर्ताओं को दी ये सलाह

कमलनाथ ने अपनी खुली चिट्ठी में अब कांग्रेस नेता-कार्यकर्ताओं को दी ये सलाह

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेशवासियों और सभी कांग्रेस नेता-कार्यकर्ताओं को एक पत्र लिखा है जिसमें उन्होने 21 दिनों के लॉकडाउन का समर्थन करते हुए सभी से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की अपील की है। इसी के साथ उन्होने लिखा है कि ऐसे संकट के समय सभी कांग्रेस विधायक, नेता और कार्यकर्ता जनता की सहायता के लिये आग आएं।

कमलनाथ ने कांग्रेस विधायकों, स्थानीय निकायों के जनप्रतिनिधियों और कांग्रेस के सभी पदाधिकारियों से अपील की है कि वो समाज के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करें और स्थानीय प्रशासन के साथ सहयोग करें। उन्होने सुझाव दिया कि जनहित के लिये ये लोग अपने टेलीफोन नंबर भी सोशल मीडिया पर मुहैया कराए ताकि जरूरतमंद लोग उनसें संपर्क कर सहायता ले सके।

उन्होने अपने पत्र में लिखा है कि 21 दिन के लॉकडाउन की स्थिति में रोज आजीविका अर्जन करने वाले मजदूर और गरीब वर्ग, छोटे दुकानदार और वेंडर्स आदि के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, कमलनाथ ने लिखा है कि कार्यवाहक मुख्यमंत्री रहते उन्होने सुनिश्चित किया था कि ऐसे सभी लोगों को 3 महीने का राशन एकमुश्त तथा एक महीने का राशन मुफ्त उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होने कहा कि स्थानीय प्रशासन से मिलकर ऐसे जरूरतमंद लोगों को घर जाकर राशन मुहैया कराया जा सकता है, साथ ही उन्होने आह्वान किया कि जो लोग सक्षम हैं वो ऐसे जरूरतमंदों की सहायता करें।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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