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कमलनाथ ने SIR की पारदर्शिता पर उठाए सवाल, बोले ‘एक ही व्यक्ति के नाम से दर्जनों नाम काटने के आवेदन, वोट चोरी का सुनियोजित षड्यंत्र’

Written by:Shruty Kushwaha
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उन्होंने पूछा कि जब निर्वाचन आयोग का बीएलओ एक-एक घर जाकर SIR के दौरान मतदाताओं को जांच परख चुका है तो उसके बाद किसी गैर सरकारी व्यक्ति द्वारा किसी मतदाता का नाम काटने की सिफ़ारिश करने की क्या तुक है। पूर्व सीएम ने कहा कि इसका सीधा मतलब है कि निर्वाचन आयोग को खुद ही SIR की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भरोसा नहीं है।
कमलनाथ ने SIR की पारदर्शिता पर उठाए सवाल, बोले ‘एक ही व्यक्ति के नाम से दर्जनों नाम काटने के आवेदन, वोट चोरी का सुनियोजित षड्यंत्र’

Kamal Nath

कांग्रेस लगातार SIR को लेकर सवाल कर रही है। अब एक बार फिर कमलनाथ ने मध्यप्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर निर्वाचन आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि आयोग ने बड़े दावों के साथ शुरुआत की थी कि यह मतदाता सूची का शुद्धिकरण किया जाएगा लेकिन अब यह साफ़ हो गया है कि SIR “पूरी तरह विफल” साबित हुई है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में हजारों लोगों के नाम फर्जी तरीके से कटवाने के लिए आवेदन किए गए हैं। अब यह भी सामने आया है कि एक ही व्यक्ति के नाम से दर्जनों मतदाताओं के नाम काटने के आवेदन भेजे गए जबकि उस व्यक्ति को ऐसे किसी आवेदन की कोई जानकारी नहीं है।

कमलनाथ ने SIR प्रक्रिया पर उठाए सवाल

कमलनाथ ने कहा कि राहुल गांधी ने शुरुआत से ही SIR को वोट चोरी का सुनियोजित षड्यंत्र बताया है। मीडिया रिपोर्ट् के हवाले से उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया जनता को परेशान करने और भारत के सम्मानित नागरिकों को प्रताड़ित करने के उद्देश्य से चलाई गई। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के माध्यम से जनता के सामने यह ढोंग रचा गया कि मतदाता सूचियों का शुद्धिकरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा है कि अब यह बात भी सामने आ गई है कि एक ही व्यक्ति के नाम से दर्जनों लोगों के नाम काटने के आवेदन भेजे गए और उस व्यक्ति को ऐसे किसी आवेदन की जानकारी ही नहीं है।

निर्वाचन आयोग पर लगाए आरोप

पूर्व सीएम ने सवाल उठाया है कि जब बीएलओ ने एक-एक घर जाकर SIR के दौरान मतदाताओं की जांच-पड़ताल पूरी कर ली है तो उसके बाद किसी गैर-सरकारी व्यक्ति द्वारा नाम काटने की सिफारिश की क्या जरूरत है। कमलनाथ ने कहा है कि मतदाता सूची को “शुद्ध” दिखाने के नाम पर ऐसे लूप-होल छोड़े गए हैं, जहां से सत्ताधारी पार्टी अपनी मर्ज़ी के अनुसार मतदाताओं का चयन कर सकती है। उन्होंने आरोप लगाया है कि इसका सीधा मतलब है कि निर्वाचन आयोग को खुद ही SIR की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भरोसा नहीं है और वह जानबूझकर पार्टी विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए इस तरह के प्रावधान कर रहा है।