कमलनाथ का बयान-अस्थिर करने की BJP की असफल चाल

कमलनाथ का बयान-अस्थिर करने की BJP की असफल चाल

भोपाल।मुख्यमंत्री (chief minister) कमलनाथ (kamalnath) ने प्रदेश में हुए सियासी घटनाक्रम को बीजेपी (bjp) का माफियाओं के साथ मिलाजुला प्रयास बताया है और कहा है कि ऐसे प्रयास लगातार प्रदेश की बीजेपी कर रही है और ऐसा प्रदेश की कांग्रेस (congress) की सरकार (government) को अस्थिर करने के लिए किए जा रहा है।

कमलनाथ ने बयान में आगे कहा है कि दरअसल भूमाफिया, संगठित अपराध माफिया, नकली दवाओं का व्यापार और शुद्ध के लिए युद्ध का जो अभियान सरकार कई दिनों से चला रही है ,यह सब भाजपा के राज में 15 साल में पनपा हैं और भाजपा (bjp) इनका खत्म होना पहचान नहीं पचा रही है। इसीलिए अलोकतांत्रिक तरीके से सत्ता में आने के मंसूबे पाल रही है ।कान्ग्रेस की पिछले सवा साल की उपलब्धियां भी भाजपा को पच नहीं रही हैं और उसका जनाधार निरंतर खिसक रहा है। बीजेपी को लगता है कि हमारी सरकार 5 साल में मध्यप्रदेश को शीर्ष पर लाकर खड़ा कर देगी, इस डर से भी बीजेपी लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की हत्या करना चाहती है।

दरअसल बीजेपी गोवा (goa), कर्नाटक (karnatak), महाराष्ट्र (maharashtra), हरियाणा (hariyana) सहित कई राज्यों में लोकतंत्र की हत्या कर चुकी है और यही प्रयास मध्यप्रदेश में दोहराने का प्रयास कर रही है। कमलनाथ ने आगे बयान में कहा है कि इन सब साजिशों षङयंत्रों के बाद भी हम अपने कर्तव्य पथ से नहीं डिगेगे और मजबूती के साथ प्रदेश की तस्वीर बदलते रहेंगे ।बीजेपी के इन कृत्यों का समय आने पर जवाब भी दिया जाएगा।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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