कमल पटेल की चेतावनी, ‘राहुल गांधी और कमलनाथ माफी मांगे, नहीं तो होगी एफआईआर’

कमल पटेल की चेतावनी, ‘राहुल गांधी और कमलनाथ माफी मांगे, नहीं तो होगी एफआईआर’

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| उपचुनाव (Byelection) से पहले मध्य प्रदेश (MadhyaPradesh) में किसान कर्जमाफी (Karjmafi) को लेकर सियासत गर्म है| इस बीच कृषिमंत्री कमल पटेल (Kamal Patel) ने पूर्व सीएम कमलनाथ (Kamalnath) और राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से माफी की मांग की है| कृषि मंत्री कमल पटेल ने चेतावनी दी कि अगर राहुल गांधी और कमलनाथ ने माफ़ी नहीं मांगी तो मैं किसानों से उनके खिलाफ एफआईआर करवाऊंगा|

कमल पटेल ने कमलनाथ पर आरोप लगाया कि 2 लाख तक किसानों के कर्ज माफी का वादा पूरा नहीं किया है जिस वजह से किसान डिफाल्टर हो गया है| किसानों ने कांग्रेस को कर्जमाफी के वादे के कारण वोट दिया था| राहुल गांधी ने कहा था कि 10 दिन में अगर कर्जा माफ नहीं किया, तो मुख्यमंत्री बदल देंगे। कमलनाथ ने दो घंटे में ही कर दिया। कर्जा माफी का प्रमाण पत्र प्राप्त करके किसान खुश हो गए। लेकिन उनके साथ धोखाधड़ी हुई। किसी भी किसान का दो तो क्या एक लाख रुपए तक का कर्जा माफ नहीं हुआ। इसके चलते किसानों ने बैंक की किश्त नहीं भरी और वे डिफाल्टर हो गए।

कृषि मंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि कृषि मंत्री होने के नाते मैं मांग करता हूं कि राहुल गांधी माफी मांगे, उन्होंने जो वादा किया वो पूरा नहीं कर पाए साथ ही कमलनाथ भी इस पर माफी मांगें| पटेल ने चेतावनी दी कि अगर राहुल गांधी और कमलनाथ ने माफ़ी नहीं मांगी तो मैं किसानों से उनके खिलाफ एफआईआर करवाऊंगा|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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