भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी IT खरीदी और टेंडरों को लेकर कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। निशाने पर आदिम जाति कल्याण विभाग की IT खरीदी के साथ उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत SPD-RUSA के Computer Lab और ICT से जुड़े टेंडर हैं। मिश्रा ने कथित कार्टेल, किसी खास वेंडर के हिसाब से टेंडर की शर्तें बदलने, प्रभावशाली लोगों की भूमिका और अधिकारियों-वेंडरों के बीच संभावित हितों के टकराव की जांच कराने की मांग की है।
मिश्रा ने अपने पत्र के साथ टेंडर और उनसे जुड़े दस्तावेजों का हवाला देते हुए खास तौर पर Pegasus Retail India Private Limited से जुड़े घटनाक्रम पर सवाल उठाए हैं। उनका सबसे बड़ा सवाल अलग-अलग समय पर टेंडर में रखी गई turnover की शर्त और Pre-Bid Query के बाद उसमें हुए बदलाव को लेकर है।
पहले ₹49 करोड़ की शर्त घटकर हुई ₹25 करोड़
पत्र में वर्ष 2022-23 की उस निविदा का जिक्र किया गया है, जो 98 उच्च शिक्षण संस्थानों में Computer Lab Equipment से संबंधित थी। इसमें bidder के लिए पिछले तीन वित्तीय वर्षों का औसत सालाना turnover ₹49 करोड़ मांगा गया था।
13 जनवरी 2023 की Pegasus Retail India की Pre-Bid Query में इस शर्त पर सवाल उठाया गया। कंपनी ने कहा कि ₹49 करोड़ का turnover मांगने से बढ़ते startups और छोटे MSME की भागीदारी सीमित होगी और इस शर्त को कम किया जाना चाहिए।
इसके बाद जारी Corrigendum-4 में ₹49 करोड़ की turnover requirement को घटाकर ₹25 करोड़ कर दिया गया।
मिश्रा ने इसी घटनाक्रम को आधार बनाकर पूछा है कि टेंडर की पात्रता में इतना बड़ा बदलाव किन आधारों पर किया गया और इसका फैसला किस स्तर पर लिया गया?
2025 में कहानी उलटी, ₹40 करोड़ की शर्त बढ़कर ₹52 करोड़
मिश्रा ने इसके बाद 2025 में उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत 108 सरकारी कॉलेजों में 40-seater Computer Lab लगाने से जुड़े टेंडर का मामला उठाया है।
इस टेंडर में bidder के लिए पिछले तीन वित्तीय वर्षों का औसत सालाना turnover ₹40 करोड़ रखा गया था।
Pre-Bid दस्तावेज में Pegasus Retail India की ओर से इस पर कहा गया कि करीब ₹50 करोड़ की अनुमानित लागत वाले प्रोजेक्ट में ₹40 करोड़ की turnover requirement केवल 80 प्रतिशत है। पुराने समान ICT और infrastructure projects में इसे project value के 100 प्रतिशत तक रखे जाने का हवाला देते हुए turnover criteria बढ़ाने की मांग की गई।
इसके बाद 28 अक्टूबर 2025 को Corrigendum-2 जारी हुआ और ₹40 करोड़ की turnover requirement बढ़ाकर ₹52 करोड़ कर दी गई।
इन्हीं दोनों मामलों को सामने रखते हुए मिश्रा ने मुख्य सचिव से सवाल किया है कि एक टेंडर में Pegasus की आपत्ति के बाद ₹49 करोड़ की शर्त घटकर ₹25 करोड़ हो गई और दूसरे टेंडर में कंपनी की मांग के बाद ₹40 करोड़ की शर्त बढ़कर ₹52 करोड़ पहुंच गई, तो इन बदलावों का आधार क्या था?
सिर्फ turnover नहीं, दूसरी शर्तों पर भी सवाल
मिश्रा के पत्र में मामला केवल turnover तक सीमित नहीं रखा गया है। उन्होंने Pre-Bid Queries के बाद Desktop Processor, Printer Cartridge, Furniture Certification और दूसरी Technical Specifications में हुए बदलावों को भी जांच के दायरे में लेने की मांग की है।
दस्तावेजों में furniture से संबंधित शर्तों को लेकर भी सवाल दिखाई देते हैं। 108 कॉलेजों वाले टेंडर के Corrigendum-2 में Clause 37.19 के (a), (b), (c) और (d) को हटाए जाने का उल्लेख है।
मिश्रा ने मुख्य सचिव से यह पता लगाने की मांग की है कि टेंडर की पात्रता और तकनीकी शर्तों में किए गए बदलाव विभाग की जरूरत और ज्यादा कंपनियों को मौका देने के लिए किए गए या इनसे किसी खास vendor अथवा OEM को फायदा मिला।
आदिम जाति कल्याण विभाग की IT खरीदी को भी जांच के दायरे में लाने की मांग
केके मिश्रा ने अपने पत्र में आदिम जाति कल्याण विभाग की IT खरीदी को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने विभाग की प्रमुख IT खरीद और टेंडरों की जांच के साथ कथित Cartel Formation की पड़ताल कराने की मांग की है।
पत्र में HP से जुड़ी मध्य प्रदेश की पिछली और मौजूदा सरकारी निविदाओं का भी जिक्र किया गया है। मिश्रा ने कंपनियों, OEM, dealers और vendors के बीच ऐसा कोई नेटवर्क काम कर रहा था या नहीं, जिसने सरकारी टेंडरों में प्रतिस्पर्धा को प्रभावित किया, इसकी जांच की मांग की है।
इसी हिस्से में कथित “इंदौरी धाकड़” की भूमिका का सवाल भी उठाया गया है। मिश्रा चाहते हैं कि इस पूरे नेटवर्क की भूमिका और सरकारी खरीदी पर उसके संभावित असर की जांच हो।
108 कॉलेजों के बाद अब 323 कॉलेजों के BID पर सवाल
पत्र में SPD की 108 कॉलेजों वाली प्रक्रिया के साथ 323 कॉलेजों से संबंधित मौजूदा BID को भी उठाया गया है।
मिश्रा ने सवाल किया है कि यदि किसी पसंदीदा OEM या vendor की अपेक्षित भागीदारी नहीं आती है और उसके बाद BID को रद्द या दोबारा तैयार करने जैसी स्थिति बनती है, तो इसके पीछे के कारणों की जांच होनी चाहिए। यह पता लगाया जाए कि निर्णय वास्तविक तकनीकी या प्रशासनिक जरूरत के कारण हुआ या किसी विशेष पक्ष को फायदा पहुंचाने के लिए।
प्रभावशाली लोगों और अधिकारियों के संबंधों की भी जांच की मांग
मिश्रा ने पूरे मामले में Conflict of Interest का मुद्दा भी उठाया है। उन्होंने प्रभावशाली व्यक्तियों, संबंधित अधिकारियों, कंपनियों, vendors और OEM के बीच कथित निजी, पारिवारिक या कारोबारी संबंधों की जांच कराने को कहा है।
उनका सवाल है कि यदि ऐसे संबंध मौजूद हैं तो क्या उनका असर टेंडर बनाने, तकनीकी शर्तें तय करने, Pre-Bid Queries पर फैसला लेने, eligibility बदलने, BID रद्द करने, दोबारा टेंडर बुलाने या vendor चुनने जैसे फैसलों पर पड़ा?
पहले मुख्य सचिव को हुई शिकायत का भी मांगा हिसाब
मिश्रा के पत्र में एक और महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया गया है। इसमें कहा गया है कि SPD की 108 कॉलेजों की ICT Computer Lab प्रक्रिया में एक प्रभावशाली व्यक्ति की कथित भूमिका को लेकर पहले भी सवाल उठे थे और एक वैश्विक OEM द्वारा प्रदेश के मुख्य सचिव को शिकायत दिए जाने की बात सामने आई थी।
मिश्रा ने मांग की है कि यदि ऐसी शिकायत मुख्य सचिव कार्यालय या शासन को मिली थी तो यह भी देखा जाए कि उस शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई, किस स्तर पर जांच की गई और उसका नतीजा क्या निकला।
मुख्य सचिव से पूरे मामले की जांच कराने की मांग
केके मिश्रा ने मुख्य सचिव से आदिम जाति कल्याण विभाग की IT खरीदी के साथ SPD-RUSA की 108 और 323 कॉलेजों से जुड़ी ICT/Computer Lab निविदाओं की जांच कराने की मांग की है।
इसके साथ Pegasus Retail India से जुड़ी सभी Pre-Bid Queries, Corrigendum और Technical Specifications में हुए बदलावों की पड़ताल करने को कहा गया है। खास तौर पर ₹49 करोड़ से ₹25 करोड़ और ₹40 करोड़ से ₹52 करोड़ किए गए turnover criteria के पीछे की पूरी निर्णय प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका सामने लाने की मांग की गई है।
मिश्रा ने HP से संबंधित सरकारी टेंडरों में कथित cartel, प्रभावशाली लोगों की भूमिका और अधिकारियों, vendors तथा OEM के बीच संभावित संबंधों की भी जांच की मांग की है। साथ ही कहा है कि जांच में टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने में किसी अधिकारी या अन्य जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
Part 2
वर्तमान 323 कॉलेजों से संबंधित BID/निविदा प्रक्रिया में भी गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं। यदि किसी पसंदीदा OEM अथवा वेंडर की अपेक्षित BID या भागीदारी सामने नहीं आई, तो क्या पूरी निविदा को निरस्त अथवा पुनर्गठित करने का निर्णय वास्तविक तकनीकी एवं प्रशासनिक आवश्यकता के कारण लिया… pic.twitter.com/0ffRfBK6ne
— KK Mishra (@KKMishraINC) August 31, 2026






