कांग्रेस विधायक ने लगाया कंप्यूटर बाबा पर वसूली का आरोप

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भोपाल। रेत की खदान पर छापामारी को लेकर सुर्खियों में छाए कंप्यूटर बाबा पर गंभीर आरोप लगे हैं। चाचौड़ा से विधायक लक्ष्मण सिंह ने ने बाबा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि बाबा का रेत खदानों पर जाना दरअसल वसूली के लिए बनाया जाने वाला दबाव है। लक्ष्मण सिंह ने साफ तौर पर कहा कि बाबा के खिलाफ उनके पास कई शिकायतें हैं और समय आने पर वह उन्हें बेनकाब भी करेंगे। लक्ष्मण सिंह ने अपनी ही सरकार से सवाल करते हुए कहा कि मेरी समझ में यह नहीं आता कि सरकार को बाबा की जरूरत ही क्या पड़ी। लक्ष्मण सिंह ने कहा कि हमारी पार्टी एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी है जो विकास में विश्वास रखती है और यदि हमें नदी का संरक्षण करना और उसका अवैध उत्खनन रोकना है तो उसके लिए वैज्ञानिकों की जरूरत है ना कि बाबाओं की । वैज्ञानिक की बता पाएंगे कि किस तरह से नदी का संरक्षण होगा और उसे स्वच्छ किया जा सकेगा।

कंप्यूटर बाबा पर गंभीर आरोप लगाते हुए लक्ष्मण सिंह ने कहा कि बाबा पहले रेत खदान पर जाता है, डरा धमकाता है और उसके बाद में वसूली करता है और यह बात बहुत जल्दी निकलेगी और जब यह बात निकलेगी तो सरकार का ही मुंह नीचा होगा। यह अगर बाबा है तो जाकर हिमालय पर बैठकर तपस्या करें ।”दरअसल सारी विवाद की जड़ खुद बाबा है जिन्होंने लक्ष्मण सिंह के खिलाफ बयान दिया था कि लक्ष्मण सिंह बिना कुछ सोच समझकर अनर्गल किसी बात पर बोलते हैं ।उन्हें विषय का ज्ञान नहीं रहता। इसके जवाब में लक्ष्मण सिंह ने कहा था कि वे पांच बार सांसद और तीन बार के विधायक हैं और यदि ऐसा होता तो जनता उन्हे नहीं चुनती ।मेरे बारे में ऐसा कहना मेरे मतदाताओं का ही अपमान है। अब बाबा के बारे में दिए गए इस बयान को लेकर एक बार फिर राजनीतिक घमासान मचना तय है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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