मप्र के कुछ जिलों में दी जा सकती है लॉकडाउन में ढील

मप्र के कुछ जिलों में दी जा सकती है लॉकडाउन में ढील

भोपाल।

मध्यप्रदेश में अब तक 22 जिलों में कोरोना पेशेंट मिल चुके हैं और इसके चलते इन जिलों को पूरी तरह से लॉकडाउन कर दिया गया है। लॉकडाउन का यह फेस इन जिलों में 30 अप्रैल तक जारी रखने की उम्मीद है। इसके साथ-साथ राज्य सरकार का यह भी विचार है कि जिन जिलों में कोरोना का संक्रमण का नही फैला है, वहां कुछ चीजों में रियायत दे दी जाए।

स्कूल, कॉलेज, धार्मिक ,पिकनिक स्थल , बंद रखे जाये। जिले में परिवहन खोल दिया जाए और जिले के अंदर आवागमन होता रहे ।यदि पङोसी जिले मे कोरोना नही है तो उसे भी आवागमन के लिए खोल दिया जाए ।इसके साथ-साथ खदाने, फैक्ट्रियां और किराना स्टोर भी खोल दिए जाएं और रोजगार मूलक काम शुरू करने के लिए लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण सड़क विभाग की योजनाओं पर काम शुरू हो जाए। मध्यप्रदेश में अभी तक कोरोना संक्रमण को देखते हुए भोपाल और इंदौर को रेड जोन में बांटा गया है। इसके साथ-साथ ऑरेंज जोन में उज्जैन मुरैना बड़वानी ग्वालियर देवास शिवपुरी जबलपुर खरगोन होशंगाबाद खंडवा छिंदवाड़ा बैतूल धार रायसेन श्योपुर सागर शाजापुर विदिशा मंदसौर रतलाम जिले हैं ।ग्रीन जोन में बाकी के सभी 30 जिले हैं।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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