कोरोना को लेकर एमपी पुलिस की ये अपील आपको इमोशनल कर देगी, देखें तस्वीरें

कोरोना को लेकर एमपी पुलिस की ये अपील आपको इमोशनल कर देगी, देखें तस्वीरें

भोपाल. कोरोना को लेकर पूरी दुनिया में लोगों को घर की दहलीज न लांघने की सलाह दी जा रही है. तमाम अपीलों के बावजूद कुछ लोग इस बात को समझने के लिए तैयार ही नहीं हैं. ऐसे में मध्यप्रदेश पुलिस ने पोस्टर्स और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से मार्मिक ढंग से अपील की है.

इन पोस्टर्स के ज़रिए पुलिस लोगों को ये बताने की कोशिश कर रही है कि पुलिसकर्मी किस प्रकार अपनी व्यक्तिगत भावनाओं व मोह से उठकर देश और समाज के लिए ख़ुद को खतरे में डालकर भी ड्यूटी पर मुस्तैद हैं. बदले में वे केवल इतना ही चाहते है कि लोग अपनी और देश की सुरक्षा के लिए घरों में ही रहें.

आइए नज़र डालते हैं इन तस्वीरों पर…

पहली तस्वीर में पुलिस का एक जवान मुंह पर कपड़ा बांधे कह रहा है कि उसके भी बच्चे है, लेकिन आपकी सुरक्षा के लिए वह मुस्तैद है. कृपया आप घर पर ही रहिए.

तस्वीर में पुलिस का एक जवान मुंह पर कपड़ा बांधे कह रहा है कि उसके भी बच्चे है, लेकिन आपकी सुरक्षा के लिए वह मुस्तैद है. कृपया आप घर पर ही रहिए.

दूसरी तस्वीर एक महिला पुलिसकर्मी की है जो कह रही है की उसका मन भी परिवार के साथ रहने और समय बिताने का है, लेकिन उसका फ़र्ज़ उसे इसकी इजाज़त नहीं देता. आपके साथ ऐसी बाध्यता नहीं है तो कृपया आप तो घर में रहकर सहयोग करें.

एक अन्य तस्वीर में एक महिला पुलिसकर्मी कह रही है कि खतरे उन पर भी उतने ही बड़े हैं, लेकिन फिर भी पुलिस आपके लिए खड़ी है.

तस्वीरें और भी हैं. हर तस्वीर अपने-अपने ढंग से केवल एक ही बात कह रही है कि आम जनता पुलिस व अन्य कोरोना वॉरियर्स का सहयोग करे न कि जाने-अनजाने में रोड़े अटकाने का काम न करें.

जाहिर है कि ख़ाकी वर्दी में जगह-जगह पर तैनात ये लोग कोरोना के ख़िलाफ़ जंग में बेहद अहम् भूमिका निभा रहे हैं. खुद को ख़तरे में डालकर ड्यूटी करने वाले इन लोगों की कोशिशें सार्थक तभी हो सकती हैं जब हम इनकी बात मानकर घरों में ही रहें.

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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