भाजपा और शिवराज के लिए मुसीबत बन रहे महाराज के बेलगाम मंत्री

ज्योतिरादित्य सिंधिया

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश (madhya pradesh) में विधानसभा (assembly) की 28 सीटों पर उपचुनाव (by election) होने हैं और इनमें 22 सीटें ऐसी हैं जो कांग्रेस विधायकों (congress mla) द्वारा इस्तीफा देने के कारण खाली हुई हैं। इनमें से ज्यादातर सिंधिया समर्थक (scindia supporter) माने जाते हैं, जो सिंधिया के साथ कांग्रेस से बगावत कर बीजेपी (bjp) में शामिल ही इस शर्त पर ही हुए हैं कि वे दोबारा चुनाव मैदान में बीजेपी के टिकट पर खड़े होगे। इन विधायकों में से कईयों को बिना विधायक हुए ही मंत्री बनाया गया है लेकिन इनकी कार्यशैली और व्यवहार अब बीजेपी के लिए मुसीबत का कारण बन रहा है।

पहले से ही बीजेपी के पुराने लोग इस बात को लेकर नाराज बैठे हैं कि उनके सिर पर यह नए लोग क्यों लाद दिए गए, वहीं इन मंत्रियों का व्यवहार भी बीजेपी जैसी अनुशासित मानी जाने वाली पार्टी के लिए मुसीबत का कारण बन रहा है। बात करें प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की तो बुधवार को ग्वालियर में एक ऐसा नजारा दिखा जिसमें विरोध कर रही कांग्रेसियों की भीड़ में मंत्री जी न केवल घुस गए, बल्कि एक विरोधी का गिरेबान पकड़ उसे धकिया भी दिया। मंत्री जी का यह वीडियो राष्ट्रीय चैनलों की सुर्खियां बन गया। इसके पहले राजस्व व परिवहन मंत्री गोविंद राजपूत का एक ऑडियो वायरल हो चुका है जिसमें एक व्यक्ति को वह अपने पास आने के लिए कहते हैं और उसके मना करने पर उसे बेहद तल्ख अंदाज में डांट देते हैं। गुरुवार को तो हद ही हो गई, प्रदेश की महिला और बाल विकास मंत्री इमरती देवी का एक वीडियो वायरल हो गया जिसमें मंत्री जी कह रही हैं कि “कांग्रेस सभी 28 सीटों पर चुनाव जीतने के दावे भले ही करें लेकिन बीजेपी बहुमत के लिए आवश्यक 8 सीट तो जुटा ही लेगी। सरकार चाहे तो कलेक्टर की क्या मर्जी कि वह सीट जिताकर न दे।” यानी सीधे-सीधे निष्पक्ष चुनावों और विश्वसनीय चुनाव पर ही सवालिया निशान खड़े हो गए। कांग्रेस ने मंत्री जी की इस रवैये की शिकायत चुनाव आयोग से की है और सभी 14 मंत्रियों को हटाने की मांग कर डाली है। ऐसे में अब शिवराज की मुसीबत यह है कि सिंधिया के समर्थन पर टिकी सरकार के इन मंत्रियों के व्यवहार और क्रियाकलापों के ऊपर कैसे भाजपा के अनुशासन का डंडा चलाया जाए, क्योंकि कांग्रेस में वर्षों रहकर इन्हें सिर्फ और सिर्फ महाराज का कहा मानने की आदत रह गई है।

Shruty Kushwaha
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Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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