कर्मचारी हित में परिवहन विभाग का बड़ा फैसला

कर्मचारी हित में परिवहन विभाग का बड़ा फैसला

भोपाल।

सरकार को सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले विभागों में से एक परिवहन विभाग में अक्सर अधिकारियों की कमी का रोना रोया जाता है। हालात यह है कि प्रदेश के 52 जिलों में से अधिकांश में आरटीओ का पद प्रभारी अधिकारियों के हवाले है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए अब परिवहन विभाग एक नया प्रयोग करने जा रहा है। हालांकि यह प्रयोग पहले भी मध्य प्रदेश सचिवालय, गृह विभाग, उच्च शिक्षा विभाग ,राजस्व मंडल और राजस्व विभाग भी कर चुके हैं ।विभाग शीघ्र लेखक वर्ग प्रथम (राजपत्रित सेवा 2) को पदोन्नत कर फील्ड पोस्टिंग देने की तैयारी में है। विभाग की इस निर्णय के पीछे सोच है कि एक तो इससे विभाग में काम करने वाले कर्मचारी अधिकारी प्रोत्साहित होंगे वहीं दूसरी ओर फील्ड में अधिकारियों की कमी को पूरा किया जा सकेगा और इसके कारण विभाग को राजस्व आय में और ज्यादा बढ़ोतरी होगी। परिवहन मंत्री, प्रमुख सचिव परिवहन और परिवहन आयुक्त तीनों की सम्मिलित योजना का लाभ परिवहन विभाग को मिलेगा, ऐसा साफ तौर पर लगता है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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