विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह: भोपाल के काटजू अस्पताल में महिलाओं की स्क्रीनिंग, मातृत्व मानसिक स्वास्थ्य पर परामर्श

महिला के मानसिक स्वास्थ्य का असर उसके साथ-साथ बच्चे और पूरे परिवार पर भी पड़ता है। इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए आयोजित शिविर में महिलाओं को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान, समय पर परामर्श और उपचार के महत्व की जानकारी दी गई।
Mental Health Awareness

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विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह (10 से 16 अक्टूबर) के अंतर्गत 14 अक्टूबर को स्थानीय डॉ. कैलाशनाथ काटजू अस्पताल में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम और शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर भोपाल के जय प्रकाश चिकित्सालय में संचालित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला भोपाल और सिविल सर्जन, जय प्रकाश चिकित्सालय के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ।

शिविर का उद्घाटन काटजू अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बलराम उपाध्याय, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के उप संचालक (मानसिक स्वास्थ्य) डॉ. निशांत मिश्रा और आरएमओ डॉ. विवेक अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर जय प्रकाश चिकित्सालय के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके बैरागी भी मौजूद थे। सत्र का संचालन चिकित्सा मनोवैज्ञानिक राहुल शर्मा ने किया।

मातृत्व मानसिक स्वास्थ्य पर परामर्श

मातृत्व मानसिक स्वास्थ्य के तहत गर्भावस्था और प्रसव के बाद महिलाओं में होने वाले तनाव, चिंता और अवसाद के लक्षणों को समय पर पहचानना बेहद जरूरी है। परिवार का सहयोग और विशेषज्ञों से परामर्श महिलाओं को इस दौर में मानसिक रूप से स्वस्थ रहने में मदद कर सकता है। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि मातृत्व मानसिक स्वास्थ्य की संकल्पना मां, बच्चे, परिवार और समाज सभी के परिप्रेक्ष्य में बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए इस विषय पर सभी को जागरूक करना आवश्यक है।

उद्घाटन सत्र के बाद 150 से अधिक महिलाओं को मातृत्व मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न आयामों के बारे में जागरूक किया गया। इस दौरान राहुल शर्मा, डॉ. मनोज गौड़, सपना राय, डॉ. रोहिता, डॉ. अभिषेक और आरिफा खान ने महिलाओं को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी दी। साथ ही निःशुल्क मानसिक स्वास्थ्य परामर्श सेवा ‘टेलीमानस’ (14416) और मानसिक स्वास्थ्य स्क्रीनिंग एवं जागरूकता एप ‘मैनहिट’ के बारे में भी बताया गया।

मानसिक स्वास्थ्य शिविर में 70 से अधिक महिलाओं की स्क्रीनिंग

जागरूकता सत्र के बाद मानसिक स्वास्थ्य स्क्रीनिंग, उपचार और परामर्श सत्र आयोजित किए गए। इसमें 70 से अधिक महिलाओं की मानसिक स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की गई। इनमें से 24 महिलाओं में हल्के अवसाद और चिंता के लक्षण पाए गए। विशेषज्ञ स्टाफ ने उन्हें साइकोएजुकेशन और काउंसलिंग प्रदान की। वहीं, जिन महिलाओं में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं अधिक पाई गईं, उन्हें आगे के उपचार और परामर्श के लिए ‘मनकक्ष’ रेफर किया गया है।

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Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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