मंत्री ने मांगी माफी, दिव्यांगों पर की थी अशोभनीय टिप्पणी

मंत्री ने मांगी माफी, दिव्यांगों पर की थी अशोभनीय टिप्पणी

भोपाल।

मध्य प्रदेश के जल संसाधन मंत्री हुकुम सिंह कराङा ने अपने बयान के लिए माफी मांग ली है। दरअसल शुक्रवार को कराड़ा का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वे दिव्यांगों के लिए अशोभनीय टिप्पणी करते नजर आ रहे थे ।उनकी इस टिप्पणी के बाद काफी बवाल मचा और विभिन्न संगठनों सहित बीजेपी ने इस बयान की कड़ी आलोचना करते हुए कराङा पर निशाना साधा था ।उसके बाद कराड़ा ने बाकायदा जनसंपर्क विभाग के माध्यम से एक प्रेस नोट जारी किया है जिसमें उन्होंने लिखा है”किसान कर्ज़ माफ़ी सम्मेलन के दौरान संबोधन मे मेरे द्वारा निशक्तजनों के प्रति बोलचाल व प्रचलन की भाषा मे जो शब्द बोल दिए इसका मुझे दुःख है। मेरी भावना किसी को ठेस पहुंचाने की कतई नही थी। निशक्तजन यानी दिव्यांगजन के प्रति मैं पूरा सम्मान व्यक्त करता हूँ। मेरा आशय इनके लिए पेंशन 300 ₹ से बढ़ाकर 1000 ₹ पेंशन कर देना हमारी सरकार की “सेवा भावना” को दर्शाता है। विरोधियों को यह 1000 ₹ पेंशन कर देने से दर्द हो रहा है। दिव्यांगजन हर वर्ग हर जाति मे हमारे वो समाजजन है जो हमे सेवा करने की प्रेरणा देते है।

बीजेपी विधायक ने की थी बयान की निंदा
विधायक यशपालसिंह सिसौदिया ने ट्वीट करते हुए कहां कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकलांग पुकारे जाने वालों को निशक्त फिर दिव्यांग के नाम से पुकारकर सम्मान दिया, लेकिन मंदसौर जिले के प्रभारी मंत्री हुकमसिंह कराड़ा ने लूले-लंगड़े, अंधे कह कर क्या संदेश दिया?

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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