पैरों में गिरकर गुहार लगाती रही महिला, मंत्री बोले बंद करो नौटंकी

पैरों में गिरकर गुहार लगाती रही महिला, मंत्री बोले बंद करो नौटंकी

भोपाल/रीवा।

मध्य प्रदेश के रीवा जिले के दौरे पर आए ग्रामीण व पंचायत विकास मंत्री कमलेश्वर पटेल विवादों में घिर गए हैं। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। जिसमें वह एक महिला कर्मचारी को धक्का देते दिखाई दे रहे हैं। यही नहीं उन्होंने महिला की फरयाद भी सुनने से इनकार कर दिया। बताया जा रहा है कि बुधवार को नगर निगम की संविदा कर्मी महिला उनके पास अपनी फरियाद लेकर आई थी। वह मंत्री पटेल के पैरों पर गिरकर अपनी गुहार लगाने लगी। महिला की बात को अनसुना करते हुए मंत्री ने साफ कह दिया कि नाटक बंद करो। इस वीडियो को पूर्व सीएम शिवराज ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है। उन्होंने लिखा है कि कांग्रेस के नेता सत्ता के नशे में चूर हैं। इन्हें जिन नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए चुना गया है, अब उनके आंसू भी दिखाई देना बंद हो गये हैं। गरीबों के ये आंसू इन्हें ले डूबेंगे।

दरअसल, नगर निगम की संविदा कर्मी मुन्नी पटेल का कहना था कि उसे एक माह से वेतन नहीं मिला है। वह मंत्री जी से वेतन दिलाने की मांग करने आई थीं। जब मंत्री ने झिड़क दिया तो महिला की आंखों से आंसू गिरने लगे। इस पर मंत्री ने कहा कि रोना गाना बंद करें। नाटक-नौटंकी यहां नहीं चलने वाली है। अभी मैं पत्रकार वार्ता करने आया हूं। बाद में बात करूंगा। इस मामले में मंत्री कमलेश्‍वर पटेल ने पार्षद नम्रता सिंह पर पूरी घटना का प्लान करने का आरोप लगा दिया। इसके साथ ही मौके पर मौजूद रीवा कलेक्टर बसंत कुर्रे ने भी कहा कि योजना के तहत उक्त महिला मंत्री तक पहुंची है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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