MP में 540 रेजिडेंट डॉक्टरों की पोस्टिंग अटकी, उमंग सिंघार बोले “जनता को भुगतनी पड़ेगी सरकार की लापरवाही”

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा के विज्ञापनों में दिखाए जाने वाले स्वस्थ मध्यप्रदेश के दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है। उन्होंने सरकार से रेजिडेंट डॉक्टरों की पोस्टिंग जल्द पूरी कर अस्पतालों में चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है।
Doctor Age

सांकेतिक तस्वीर

मध्यप्रदेश में जिला रेजिडेंसी प्रोग्राम (डीआरपी) के तहत रेजिडेंट डॉक्टरों की पोस्टिंग में हो रही देरी अब राजनीतिक मुद्दा बन गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार की प्रशासनिक लापरवाही के कारण 540 रेजिडेंट डॉक्टरों की पोस्टिंग अटक गई है, जिससे सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों का संकट गहरा गया है और इसका खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पताल पहले ही डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में डीआरपी के तहत कार्यरत पुराने बैच का कार्यकाल समाप्त होने के बाद वे जिला अस्पतालों से वापस लौट गए, जबकि नए बैच के डॉक्टरों को अब तक पदस्थापना नहीं मिली है। इससे एक साथ सैकड़ों रेजिडेंट डॉक्टर जिला अस्पतालों से बाहर हो गए हैं।

उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा

उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था संभालने के बजाय अव्यवस्था को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि जिस प्रदेश में मरीज पहले ही घंटों इलाज के लिए इंतजार करने को मजबूर हैं, वहां डॉक्टरों की पोस्टिंग तक समय पर नहीं हो पा रही है। कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार विज्ञापनों में “स्वस्थ मध्यप्रदेश” का दावा करती है, लेकिन वास्तविक स्थिति यह है कि अस्पताल डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार तत्काल रेजिडेंट डॉक्टरों की पोस्टिंग सुनिश्चित करे, क्योंकि प्रदेश की जनता को भाषण नहीं बल्कि अस्पतालों में डॉक्टर चाहिए।

क्या है मामला

डिस्ट्रिक्ट रेजिडेंसी प्रोग्राम के तहत स्नातकोत्तर रेजिडेंट डॉक्टरों को तीन महीने के लिए जिला अस्पतालों में सेवाएं देना अनिवार्य होता है। इस वर्ष नए बैच को एक जुलाई से जिला अस्पतालों में कार्यभार संभालना था लेकिन अब तक पोस्टिंग आदेश जारी नहीं किए गए हैं। दूसरी ओर, पुराने बैच का कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्हें रिलीव कर दिया गया। इससे कई जिला अस्पतालों में रेजिडेंट डॉक्टरों की उपलब्धता प्रभावित हुई है।

बता दें कि मध्यप्रदेश सरकार ने हाल ही में जिला रेजिडेंसी प्रोग्राम की व्यवस्था में बदलाव किए हैं। पहले रेजिडेंट डॉक्टरों की पोस्टिंग राज्य स्तर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा तय की जाती थी और डॉक्टर चॉइस फिलिंग के माध्यम से अपनी पसंद के जिले या अस्पताल का विकल्प दे सकते थे। नई व्यवस्था में यह अधिकार राज्य स्तर से हटाकर संबंधित मेडिकल कॉलेजों को दे दिया गया है। अब प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में डीन की अध्यक्षता में गठित पांच सदस्यीय डीआरपी प्लेसमेंट एलोकेशन कमेटी रेजिडेंट डॉक्टरों की पोस्टिंग तय करेगी। समिति में विभागाध्यक्ष और अन्य नामित सदस्य शामिल होंगे, जो उपलब्ध रिक्तियों और प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर जिला अस्पतालों का आवंटन करेंगे। इसके साथ ही यह भी प्रावधान किया गया है कि रेजिडेंट डॉक्टरों की पोस्टिंग मुख्य रूप से उसी संभाग के भीतर की जाएगी, जहां से वे संबद्ध मेडिकल कॉलेज में अध्ययन कर रहे हैं। इस बदलाव के बाद पोस्टिंग प्रक्रिया का पूरा प्रारूप बदल गया है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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