कोरोना का कर्फ्यू: भोपाल में एक और कोरोना पॉजिटिव, एक संदिग्ध की मौत

कोरोना का कर्फ्यू: भोपाल में एक और कोरोना पॉजिटिव, एक संदिग्ध की मौत

भोपाल।
इंदौर के बाद मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में भी संक्रमण का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।अब भोपाल में कोरोना वायरस के 2 नए मरीज सामने आए हैं। इनमें 21 साल का एक युवक भी बताया जा रहा है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने इसकी पुष्टी नही की है, अभी रिपोर्ट आना बाकी है। इसके साथ ही भोपाल में पॉजिटिव मरीजों की संख्या 5 हो गई है।प्रदेश में अब तक 66 लोगों में कोरोना वायरस की पुष्टि हो चुकी है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ सुधीर कुमार डेहरिया ने सोमवार रात से इलाज के लिए एक बीमार व्यक्ति को लाया गया था एंबुलेंस से सीधे एम्स भेजा गया था। एम्स में उस व्यक्ति की मौत हो गई है। इस व्यक्ति की कोरोना रिपोर्ट अभी तक नहीं प्राप्त हुई है। इसके अतिरिक्त एक अन्य व्यक्ति जो 20 तारीख को लंदन से दिल्ली आया और दिल्ली से मुंबई गया, मुंबई से इंदौर आया था इंदौर में उसे कोरेंटिन किया गया था किंतु इंदौर से वह भाग निकला और बाइक से छुपते हुए गांव के रास्ते से भोपाल आया। भोपाल में एक निजी अस्पताल में सोमवार आकर भर्ती हुआ था। इसकी स्थिति बिगड़ने पर एम्स में एडमिट किया गया है जिसका कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया है । निजी अस्पताल में उसके संपर्क में आये डॉक्टर और स्टाफ की पहचान की जा रही है ।इसके अलावा अन्य स्थानों पर संपर्क में आये लोगों की भी पहचान की जा रही है। पीड़ित का इलाज एम्स में जारी है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews