MP विधानसभा में गूंजा सिंगरौली के धिरौली कोल ब्लॉक का मुद्दा, कांग्रेस विधायकों का वॉकआउट, उमंग सिंघार ने की JPC जांच की मांग

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कोल ब्लॉक परियोजना से प्रभावित आदिवासी परिवारों को पूरा मुआवजा नहीं मिला है और मुआवजा वितरण में अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने प्रभावित परिवारों की संख्या और मुआवजे की राशि को लेकर सरकारी आंकड़ों में विरोधाभास होने का आरोप भी लगाया।
Singrauli Dhirouli Coal

Congress Walkout

मध्यप्रदेश विधानसभा बजट सत्र के नौवें दिन प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस ने सदन में सिंगरौली जिले के धिरौली कोल ब्लॉक का मुद्दा उठाया। विपक्षी सांसदों ने इस पूरे मामले की विधानसभा समिति (JPC) गठित कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए सदन से वॉकआउट किया।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने अडाणी ग्रुप को आवंटित धिरौली कोल ब्लॉक और उससे प्रभावित आदिवासी परिवारों के अधिकारों का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। इसी के साथ उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावित आदिवासी परिवारों को पूरा मुआवजा नहीं दिया गया है और मुआवजा वितरण में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं।

धिरौली कोल ब्लॉक के मुद्दे पर कांग्रेस का सदन से वॉकआउट

उमंग सिंघार ने कहा कि सिंगरौली जिले के धिरौली कोल ब्लॉक के लिए आठ गांवों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है और कलेक्टर की सूची के अनुसार 12,998 परिवार प्रभावित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की कोयला खदानें कौड़ियों के भाव अडाणी हाथों में दी जा रही हैं, लेकिन प्रभावित आदिवासी परिवारों को न न्याय मिला, न पूरा मुआवज़ा। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया और कहा कि आदिवासी समाज के हक से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उमंग सिंघार ने मुआवजा राशि वितरण में अनियमितता का आरोप लगाया

नेता प्रतिपक्ष सदन में आरोप लगाया कि मुआवजा राशि बाहरी लोगों को भी दी गई है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि थाना प्रभारी जितेंद्र भदौरिया की पत्नी को 15 लाख रुपये से अधिक तथा यातायात प्रभारी दीपेंद्र सिंह कुशवाह की पत्नी स्वाति सिंह के नाम पर लगभग 14 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से प्रति परिवार 40–50 लाख रुपये मुआवजे की बात कही जा रही है, जबकि प्रभावित परिवारों की संख्या को लेकर भी विरोधाभास है। कहीं 1200–1500 परिवार बताए जा रहे हैं तो कहीं लगभग 3000 परिवारों के प्रभावित होने की बात सामने आ रही है। उन्होंने मुआवजे की कुल राशि को लेकर भी अलग-अलग आंकड़े सामने आने का आरोप लगाया और कहा कि कभी 368 करोड़ रुपये तो कभी 500 करोड़ रुपये की बात कही जा रही है।

विधानसभा समिति गठित कर जांच की मांग

उमंग सिंघार ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विधानसभा समिति गठित करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की कोयला खदानें कम कीमत पर निजी कंपनियों को दी जा रही हैं, जबकि प्रभावित आदिवासी परिवारों को न्याय नहीं मिल रहा है।कांग्रेस विधायक दल ने मांग की कि सभी प्रभावित लगभग 3000 परिवारों को तत्काल पूर्ण मुआवजा दिया जाए और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। नेता प्रतिपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि जब कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल क्षेत्र का दौरा करने गया तो उसे वहां जाने से रोक दिया गया और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में वीडियो साक्ष्य भी उपलब्ध हैं। उमंग सिंघार ने मांग की है कि जब तक पूरे प्रकरण की जांच पूरी नहीं हो जाती और सभी प्रभावित परिवारों को पूरा मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक कोल ब्लॉक का कार्य तत्काल प्रभाव से रोका जाए।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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