कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर मध्यप्रदेश के करों में कटौती को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। मध्यप्रदेश का बजट एक दिन बाद पेश होने वाला है और उससे पहले कमलनाथ ने आर्थिक स्थिति को लेकर प्रदेश सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि होना तो यह चाहिए था कि केंद्र और राज्य में बीजेपी की सरकार होने पर प्रदेश को केंद्र से और ज़्यादा आर्थिक सहायता मिलती, लेकिन अगले पांच साल में करों में लगातार कमी होगी। उन्होंने कहा कि “भाजपा कि डबल इंजन की सरकार मध्य प्रदेश के लिए डबल संकट बन गई है।”
बता दें कि केंद्रीय बजट आने के बाद भी कांग्रेस ने मध्यप्रदेश के साथ भेदभाव का आरोप लगाया था। पार्टी का कहना है कि एक ओर भाजपा विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय करों में मध्यप्रदेश का हिस्सा लगभग 7,500 करोड़ रुपये तक कम कर दिया गया है। बता दें कि इस बार 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर केंद्रीय बजट में राज्यों की कुल कर हिस्सेदारी 41 प्रतिशत बरकरार रखी गई है। इस संशोधित फार्मूले के चलते मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी 7.85 प्रतिशत से घटकर लगभग 7.35 प्रतिशत रह गई है जिससे राज्य को साढ़े सात हज़ार करोड़ का नुकसान हो सकता है।
करों में कटौती को लेकर कमलनाथ ने बीजेपी सरकार को घेरा
कमलनाथ ने कहा है कि अगले पांच वर्षों में केंद्रीय करों में मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी लगातार घटने से प्रदेश को कुल 50,000 करोड़ रुपये कम मिलेंगे। उन्होंने कहा कि यह कमी ऐसे समय में हो रही है जब प्रदेश पहले से गंभीर आर्थिक संकट झेल रहा है। पूर्व सीएम ने कहा कि राज्य का कुल कर्ज अब उसके सालाना बजट से भी अधिक हो चुका है, जो सरकार की वित्तीय नाकामी को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार न तो अपने स्रोतों से पर्याप्त राजस्व जुटा पा रही है और न ही केंद्र से बढ़ी हुई सहायता हासिल कर पा रही है।
प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर लगाए आरोप
कांग्रेस नेता ने कहा कि होना तो ये चाहिए था कि केंद्र और प्रदेश दोनों जगह बीजेपी की सरकार होने के कारण एमपी को अधिक आर्थिक सहायता मिलती। लेकिन यहां उससे उलट हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि बीजेपी की डबल इंजन सरकार मध्यप्रदेश के लिए डबल संकट बन गई है। कमलनाथ ने कहा कि एक तरफ राज्य सरकार लगातार कर्ज ले रही, दूसरी तरफ केंद्र से करों में कटौती की जा रही है। इस तरह प्रदेश की आर्थिक स्थिति लगातार चरमरा रही है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार वित्तीय प्रबंधन करने में पूरी तरह नाकाम रही है और उसकी इस नाकामी का परिणाम प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ रहा है।





