चुनावी रनवे पर फिसलते नेताओं के वायदा हेलीकाप्टर, ज़ुबां पे दिल की बात आ गई

MP By election

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में होने जा रहे विधानसभा उपचुनाव (Assembly By-election) में नेताओं (Leaders) का जुबान फिसलना जहां उनकी पार्टी के लिए मुसीबत बन रहा है, वहीं इससे उनकी जग हंसाई भी हो रही है। राज्य में 3 नवंबर को 28 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होने वाला है, इसके लिए चुनाव प्रचार भी जोरों पर है। भाजपा (BJP) और कांग्रेस (Congress) दोनों ही दलों के नेता, उम्मीदवार (Candidates) और संभावित उम्मीदवार अपनी जीत के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए है। बड़ी संख्या में नेताओं ने दल-बदल भी किया है और यही कारण है कि उनकी जुबान भी खूब फिसल रही है। इन बयानों और नेताओं की कारगुजारियों के सोशल मीडिया पर वीडियो भी खूब वायरल हो रहे हैं।

पिछले दिनों दतिया के भांडेर विधानसभा क्षेत्र (Bhandar Vidhan sabha) से कांग्रेस के उम्मीदवार फूल सिंह बरैया (Phool Singh Baraiya) का एक विवादित वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। इस वीडियो में बरैया कथित तौर पर जातिवाद पर विवादित बयान देते हुए देखे गए। वहीं मांधाता से भाजपा के उम्मीदवार नारायण पटेल का कांग्रेस के लिए वोट मांगने का वीडियो भी वायरल हुआ। इतना ही नहीं, शिवपुरी जिले के पोहरी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार हरिवल्लभ शर्मा ने तो कमल नाथ को ही झूठा बता दिया।

एक तरफ जहां सोशल मीडिया पर नेताओं के बयानों के वीडियो वायरल हो रहे हैं, तो दूसरी ओर अनूपपुर से भाजपा उम्मीदवार व मंत्री बिसाहूलाल सिंह (Bishaulal Singh) के नोट बांटने का वीडियो वायरल हुआ, ठीक इसी तरह मुंगावली में मंत्री बृजेंद्र सिंह यादव (Brijendra Singh Yadav) का साड़ी बांटने का वीडियो वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रहे वीडियो पर दोनों ही राजनीतिक दल अपनी ओर से तरह-तरह की सफाई देने में लगे हैं और एक-दूसरे पर हमला भी बोल रहे हैं। कांग्रेस तो भाजपा उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव आयोग में कई शिकायतें दर्ज करा चुकी है। वहीं भाजपा, कांग्रेस पर पुराने वीडियो जारी करने का आरोप लगा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उपचुनाव के चलते नेताओं और उम्मीदवारों पर दबाव कुछ ज्यादा ही है। बड़ी संख्या में नेताओं ने दलबदल किया है और यही कारण है कि कई बार वे यह भूल जाते हैं कि इस समय किस राजनीतिक दल में हैं। यही कारण है कि वे वोट मांगने तक में गड़बड़ी कर जाते हैं और उनकी जुबान भी फिसल जाती है। अभी तो उपचुनाव दूर है, इसलिए कहा जा सकता है कि अभी ये सिलसिला थमा नहीं है, आगे और भी बहुत कुछ देखने सुनने के लिए मतदाताओं को तैयार रहना चाहिए।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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