Hindi News

MP में बाल विवाह पर नहीं लग रही लगाम! उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा, तत्काल सख्त और प्रभावी कदम उठाने की मांग

Written by:Shruty Kushwaha
Last Updated:
सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जिस कुप्रथा को रोकने में कांग्रेस को दशकों की मेहनत लगी, वही भाजपा के राज में फिर सिर उठाती नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के दावे और अभियान अपनी जगह हैं, लेकिन जमीनी हकीकत बेहद गंभीर नज़र आ रही है।
MP में बाल विवाह पर नहीं लग रही लगाम! उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा, तत्काल सख्त और प्रभावी कदम उठाने की मांग

Umang Singhar

मध्यप्रदेश में बाल विवाह के मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि सरकारी प्रयासों और अभियानों के बावजूद यह सामाजिक कुप्रथा थमने के बजाय लगातार बढ़ रही है, जो बेहद चिंताजनक स्थिति को दर्शाती है।

उन्होंने पिछले साल राज्य सरकार द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2020 में बाल विवाह के 366 मामले दर्ज हुए थे जो वर्ष 2025 में बढ़कर 538 तक पहुंच गए। कांग्रेस नेता ने कहा कि यह वृद्धि लगभग डेढ़ गुना है जो इस बात का संकेत है कि जमीनी स्तर पर रोकथाम के प्रयास अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहे हैं।

बाल विवाह की समस्या पर उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा

मध्यप्रदेश में बाल विवाह पर लगाम कसने की बजाय ये समस्या चिंताजनक गति से बढ़ रही है। उमंग सिंघार ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए इस मुद्दे पर बीजेपी को घेरा है। उन्होंने कहा कि जिस कुप्रथा को रोकने में कांग्रेस को दशकों की मेहनत लगी, वह भाजपा शासन में फिर से सिर उठा रही है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि “सरकार के दावे और अभियान अपनी जगह हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत बेहद गंभीर है। जब बचपन ही सुरक्षित नहीं, तो भविष्य कैसे सुरक्षित होगा।” उन्होंने सरकार से इस मामले में तुरंत, सख्त और प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।

चिंताजनक हैं सरकारी आंकड़े 

बाल विवाह निषेध अधिनियम और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे अभियानों के बावजूद ये कुप्रथा समाप्त नहीं हो रही। सरकारी आंकड़ों के अनुसार हाल के वर्षों में बाल विवाह की समस्या कम होने की बजाय बढ़ रही है। साल 2021 में 436 मामले सामने आए, जो 2022 में बढ़कर 519 हो गए। वर्ष 2023 में यह संख्या 528 और 2024 में 529 पहुंच गई। वहीं, 2025 में यह आंकड़ा 538 हो गया है। इस तरह 2020 के 366 बाल विवाह के मामलों में 2025 तक लगभग 47 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इन छह वर्षों में प्रदेश में लगभग 2,916 बाल विवाह के मामले दर्ज किए गए हैं।

अक्षय तृतीया जैसे शुभ मुहूर्त पर बाल विवाह की आशंका सबसे अधिक रहती है। ऐसे अवसरों पर सामूहिक विवाहों के आयोजन बढ़ जाते हैं, जिससे नाबालिग लड़कियों की शादियां होने का खतरा भी बढ़ जाता है। राज्य सरकार ने इसे देखते हुए सभी कलेक्टरों को विशेष निर्देश जारी किए हैं जिसमें सख्त निगरानी, जागरूकता अभियान और परिवार परामर्श देने पर जोर दिया गया है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
Follow Us :GoogleNews