
Umang Singhar
उमंग सिंघार ने मध्यप्रदेश में आयोजित सिविल जज परीक्षा के परिणामों को लेकर सवाल किया है कि क्या हमारी व्यवस्था हर वर्ग को समान अवसर उपलब्ध कराने में सफल हो पा रही है। उन्होंने कहा कि 191 पदों के लिए परीक्षा आयोजित हुई थी, लेकिन सिर्फ 47 अभ्यर्थियों का चयन हुआ और इनमें अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित 121 पदों में से कोई भी चयन नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि कि मुद्दा न्यायपालिका या उसकी चयन प्रक्रिया पर प्रश्न उठाने का नहीं है, और न ही मेरिट बनाम आरक्षण की बहस छेड़ने का। सिंघार ने कहा कि हम सिर्फ इतना कह रहे हैं कि सच्ची मेरिट तभी संभव है जब सभी वर्गों को तैयारी और सीखने के समान अवसर मिलें।
सिविल जज परीक्षा परिणामों को लेकर उमंग सिंघार के सवाल
उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है कि 12 नवंबर को सिविल जज परीक्षा परिणाम घोषित हुए है और 191 पदों के लिए हुई परीक्षा में सिर्फ 47 अभ्यर्थी ही सफल हो पाए है। इसी के साथ अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित 121 पदों पर एक भी उम्मीदवार पास नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि इन परिणामों के आते ही पूरे प्रदेश में एक व्यापक और स्वाभाविक बहस शुरू हो गई है। लोग यह समझना चाहते हैं कि इतने बड़े पैमाने पर आरक्षित पद रिक्त रह जाना क्या किसी गहरी संरचनात्मक कमी की ओर संकेत करता है।
‘सभी वर्गों को मिले समान अवसर’
कांग्रेस नेता ने साफ किया कि वे न्यायपालिका या उसकी चयन प्रक्रिया पर प्रश्न नहीं उठा रहे हैं, न ही मेरिट बनाम आरक्षण की बहस छेड़ने की मंशा है। उन्होंने कहा कि हम ये कह रहे हैं कि “सच्ची मेरिट तभी संभव है जब सभी वर्गों को तैयारी और सीखने के समान अवसर मिलें। जब अवसरों और संसाधनों में असमानता गहरी हो, तब मेरिट अपने वास्तविक स्वरूप में सामने ही नहीं आ पाती और यही स्थिति SC-ST तथा वंचित विद्यार्थियों को सबसे अधिक प्रभावित करती है।”
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि न्याय सिर्फ निर्णय देने का नाम नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि न्याय तक पहुँचने का रास्ता हर नागरिक के लिए समान और सुगम हो। उन्होंने कहा कि “यह आवश्यक है कि राज्य ऐसी नीतियाँ और संरचनाएँ विकसित करे जो वंचित समुदायों को न्यायिक सेवा में प्रवेश के लिए वास्तविक और बराबरी के अवसर प्रदान करें। एक समावेशी और न्यायपूर्ण मध्यप्रदेश बनाने की दिशा में यह चर्चा बेहद महत्वपूर्ण है और इसी भावना के साथ हम यह विषय सार्वजनिक रूप से उठा रहे हैं।”

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

