भोपाल में आदिरंग शिल्पकार महोत्सव का आज समापन आज, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव होंगे शामिल, जनजातीय शिल्पकारों से करेंगे संवाद

आदिरंग शिल्पकार महोत्सव के समापन अवसर पर जनजातीय कलाकारों की रचनात्मकता और कौशल को प्रदर्शित किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिल्पकारों से मुलाकात कर उनके अनुभव जानेंगे। इस महोत्सव का उद्देश्य पारंपरिक जनजातीय हस्तशिल्प को आधुनिक डिजाइन से जोड़ते हुए शिल्पकारों के लिए रोजगार और मार्केटिंग के नए अवसर उपलब्ध कराना है।
CM Mohan Yadav

फाइल फोटो

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज भोपाल में राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान मध्यप्रदेश (एनआईडी एमपी) एवं वन्या, जनजातीय कार्य विभाग द्वारा आयोजित आदिरंग शिल्पकार महोत्सव के समापन समारोह में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम एनआईडी मध्यप्रदेश परिसर, अचारपुरा में आयोजित किया जा रहा है। समारोह में जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

मुख्यमंत्री यहां जनजातीय शिल्पकारों द्वारा विकसित नवाचारपूर्ण उत्पादों और डिजाइन हस्तक्षेपों की प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे। इसके साथ ही वे शिल्पकारों, डिजाइन विशेषज्ञों और प्रतिभागियों से संवाद कर उनके अनुभवों और सुझावों को भी जानेंगे। कार्यक्रम में जनजातीय कला, शिल्प और आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों तथा डिजाइन आधारित नवाचारों की जानकारी प्रस्तुत की जाएगी।

आदिरंग शिल्पकार महोत्सव में शामिल होंगे मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज आदिरंग शिल्पकार महोत्सव के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।भोपाल में आयोजित इस पांच  आदिरंग शिल्पकार महोत्सव में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए 140 से अधिक जनजातीय शिल्पकार भाग ले रहे हैं। भील, गोंड, बैगा सहित विभिन्न जनजातीय समुदायों के कलाकार अपनी पारंपरिक कला, शिल्प और हस्तनिर्मित उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं। महोत्सव के दौरान आयोजित डिजाइन हस्तक्षेप कार्यशालाओं में शिल्पकारों ने एनआईडी मध्यप्रदेश के संकाय सदस्यों और छात्र स्वयंसेवकों के सहयोग से बाजार की मांग के अनुरूप नए उत्पाद विकसित किए हैं।

जनजातीय कला, संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान का मंच

समापन समारोह के अवसर पर कार्यशालाओं के दौरान तैयार किए गए उत्पादों और डिजाइन अवधारणाओं की विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। यह प्रदर्शनी शाम साढ़े पांच बजे से आम नागरिकों के लिए खुली रहेगी। यहां विभिन्न जनजातीय समुदायों की कलाकृतियों और हस्तशिल्प उत्पाद उपलब्ध रहेंगे। आदिरंग शिल्पकार महोत्सव को जनजातीय कला, संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान को व्यापक मंच प्रदान करने के साथ-साथ शिल्पकारों के लिए नए बाजार और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा रहा है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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