12 हज़ार शिक्षक पढ़ाने की बजाय दफ्तरों में उलझे! उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा, कहा “शिक्षा व्यवस्था की अर्थी सजाने में लगी भाजपा सरकार”

शिक्षकों की कमी को लेकर कांग्रेस ने एक बार फिर सरकार पर निशाना साधा है। नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि स्कूलों में 60,000 से ज़्यादा और कॉलेजों में 6,000 से अधिक पद रिक्त पड़े हैं और स्कूल कॉलेज में शिक्षकों को पढ़ाने की बजाये अन्य कार्यों में लगा दिया गया है जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
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मध्यप्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों की कमी को लेकर कांग्रेस लगातार सवाल उठाती आई है। एक तरफ पहले ही बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक कम हैं उसपर कई बार उन्हें शिक्षण के अलावा अन्य कामों में लगा दिया जाता है। इस कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है और उनके रिजल्ट पर भी असर पड़ता है।

एक बार फिर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि 70 कॉलेज प्रोफेसर और 12,000 स्कूली शिक्षकों को क्लास लेने की जगह सरकारी दफ्तरों में काम पर लगा दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार शिक्षा व्यवस्था की अर्थी सजाने में लगी है।

उमंग सिंघार ने शिक्षा के मुद्दे पर सरकार को घेरा

शिक्षकों का मुख्य कार्य है छात्रों को पढ़ाना। लेकिन कभी चुनाव के दौरान तो कभी एसआईआर के लिए इन्हें अलग अलग तरह की ड्यूटी पर भेज दिया जाता है। इसे लेकर कई बार शिक्षक भी आवाज़ उठा चुके हैं और कांग्रेस भी उनका समर्थन करती आई है। इसी मुद्दे पर फिर विपक्ष ने सरकार को घेरा है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा है कि “बीजेपी सरकार शिक्षा व्यवस्था की अर्थी सजाने में लगी है। 70 कॉलेज प्रोफेसर और 12,000 स्कूल शिक्षक अब कक्षा नहीं लेते बल्कि सरकारी दफ्तरों में फ़ाइल चेक कर रहे हैं। मध्यप्रदेश के कॉलेजों में 6,000 से अधिक पद खाली हैं और स्कूलों में 60,000 से ज़्यादा पद रिक्त पड़े हैं और सरकार शिक्षकों की भर्ती करने की बजाय जो बचे हुए शिक्षक हैं उन्हीं को सरकारी दफ्तरों में धकेल रही है।” उन्होंने सवाल किया कि क्या ऐसे में स्कूल-कॉलेज में बच्चो को पढ़ाने के लिए अफसरों को भेजा जाएगा।

कांग्रेस ने उठाए सवाल

इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ भी बीजेपी पर आरोप लगा चुके हैं कि शिक्षकों की कमी के बावजूद लगभग पंद्रह हज़ार शिक्षकों को शैक्षणिक कार्य करने की जगह दूसरे कामों में लगाया गया हैं। कई ऐसे स्कूल हैं जहां शिक्षक ही नहीं है और कई स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। ऐसे में मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठना लाजमी है। कांग्रेस लगातार शिक्षकों की भर्ती की मांग कर रही है और अब उसने शिक्षकों को अन्य कार्यों में लगाए जाने पर आपत्ति जताते हुए सरकार से सवाल किए हैं।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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