मध्यप्रदेश सरकार के 2,400 करोड़ के नए कर्ज पर कांग्रेस हमलावर, जीतू पटवारी ने बढ़ती उधारी पर मांगा जवाब

कर्ज के मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार को घेरते हुए वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि लगातार बढ़ती उधारी के बावजूद सरकार कर्ज लेने की जरूरत और उसके इस्तेमाल को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं कर रही है।
Jitu Patwari

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा एक बार फिर 2,400 करोड़ का कर्ज लिए जाने के बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने सरकार पर लगातार बढ़ती उधारी के जरिए राज्य पर वित्तीय बोझ बढ़ाने का आरोप लगाया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार की कर्ज नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि चालू वित्त वर्ष में अब तक लगभग 47,800 करोड़ की उधारी ली जा चुकी है और राज्य की कुल देनदारियां 5.36 लाख करोड़ से अधिक हो गई हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से बढ़ते कर्ज को लेकर जवाब मांगा है।

कांग्रेस नेता ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि “कर्ज लेकर शुद्ध-घी पीने एवं कमीशन-करप्शन के सरकारी कल्चर ने हद पार कर दी है। जवाब तैयार रखें। जनता इस लूट का हिसाब लेगी।” कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार लगातार कर्ज लेकर अपना खर्च चला रही है, लेकिन इस बढ़ती उधारी का बोझ आखिरकार प्रदेश की जनता पर ही पड़ेगा।

पांच महीने में 47,800 करोड़ की उधारी

मध्यप्रदेश सरकार ने 18 अगस्त को 2,400 करोड़ का नया कर्ज लिया है। इसके साथ वित्त वर्ष 2026-27 में 15 अप्रैल से 18 अगस्त के बीच बाजार से जुटाई गई कुल राशि करीब 47,800 करोड़ हो गई है। इस अवधि में 21 जुलाई को सरकार ने सबसे बड़ी उधारी के रूप में 24,400 करोड़ जुटाए थे। इसके बाद 4 अगस्त को भी ₹1,600 करोड़ और ₹2,000 करोड़ के दो कर्ज लिए गए।

कांग्रेस ने सरकार को घेरा

कांग्रेस लगातार लिए जा रहे कर्ज को लेकर सरकार की वित्तीय नीति पर सवाल उठा रही है। विपक्ष का कहना है कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इतनी बड़ी मात्रा में कर्ज लेने की जरूरत क्यों पड़ रही है और इससे जुटाई गई राशि का इस्तेमाल किन मदों में किया जा रहा है। जीतू पटवारी ने आरोप लगाया है कि सरकार एक तरफ विकास और बेहतर वित्तीय प्रबंधन के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर लगातार बाजार से कर्ज ले रही है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य की वित्तीय स्थिति मजबूत है और राजस्व के स्रोत बढ़ रहे हैं, तो इतनी तेजी से नई उधारी लेने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। कांग्रेस लगातार यह सवाल भी कर रही है कि सरकार द्वारा लिए जा रहे कर्ज का कितना हिस्सा विकास और पूंजीगत कार्यों में लगाया जा रहा है और कितना हिस्सा नियमित सरकारी खर्चों को पूरा करने में इस्तेमाल हो रहा है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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