मंत्रियों के गृह जिलों के शासकीय नर्सिंग कॉलेजों को नहीं मिली मान्यता, हजारों विद्यार्थियों का भविष्य अधर में

मप्र के नर्सिंग कॉलेजों में पहले 30 सिंतबर तक प्रवेश प्रकिया पूर्ण होनी थी लेकिनअब इंडियन नर्सिंग काउंसिल की अनुमति के बाद स्टेट काउंसिल को 30 अक्टूबर तक प्रवेश प्रकिया पूरी करनी है। 30 सितम्बर तक रजिस्ट्रेशन हुए , 2 अक्टूबर से च्वाइस फीलिंग शुरू हो गई है, 13 अक्टूबर को प्रोविजनल सीट अलॉमेंट, 14 से 18 अक्टूबर तक अपग्रेडेशन और प्रवेश होने हैं।
Madhya Pradesh Nursing Council

मध्य प्रदेश के नर्सिंग कॉलेज हमेशा चर्चा में रहते हैं कारण उनमें हुए घोटाले हों, फेकल्टी को लेकर फर्जीवाड़ा हो, बिना बिल्डिंग के कॉलेज का संचालन हो या फिर मान्यता के लिए फर्जी फेकल्टी की नियुक्तियां हो, लेकिन इस बार चर्चा का विषय थोड़ा अलग है, ये विषय है शासकीय कॉलेजों की मान्यता को लेकर, विशेष बात ये है  मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल (मध्य प्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल) ने इस साल 12 शासकीय कॉलेजों को मान्यता नहीं दी है और ये वो जिले हैं जहाँ सरकार के 13 मंत्री निवास करते हैं, NSUI ने इसे लेकर सवाल उठाये हैं।

मध्य प्रदेश में नर्सिंग शिक्षा के क्षेत्र में सामने आये घोटालों के बाद छात्र संगठन एनएसयूआई ने 13 नर्सिंग कॉलेजों की शिकायत की, उन्होंने कहा कि कॉलेजों में शैक्षणिक ढांचे की भारी कमी, फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र, नियुक्तियों में धांधली और नर्सिंग काउंसिल के मानकों की खुली अनदेखी की गई जिसकी जाँच होनी चाहिए लेकिन सरकार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया, अब जब शैक्षणिक सत्र 2025-26 की सूची सामने आई तो मलूँ चला कि बहुत से शासकीय कॉलेज ही मान्यता से वंचित रह गए क्योंकि उन्होंने मध्यप्रदेश नर्सिंग शिक्षण संस्था मान्यता नियम 2018 की गाइडलाइन का पालन ही नहीं किया।

इस सत्र के लिए मात्र 8 शासकीय नर्सिंग कॉलेजों को मिली मान्यता 

शैक्षणिक सत्र 2025-26 में कुल 33 नए नर्सिंग कॉलेज और 360 पुराने नर्सिंग कॉलेजों ने नवीनीकरण के लिए आवेदन किए थे। इनमें शासकीय नर्सिंग कॉलेज शामिल थे, जब मान्यता की सूची जारी हुई तो नर्सिंग काउंसिल ने सिर्फ 8 शासकीय नर्सिंग कॉलेजों को ही मान्यता प्रदान की, शेष कॉलेज मान्यता से वंचित रह गए, खास बात ये है कि जिन 12 कॉलेजों को मान्यता नहीं मिली उन जिलों में मध्य प्रदेश सरकार के 13 मंत्री निवास करते हैं, अब इन कॉलेजों के बंद होने का खतरा है और यदि ऐसा हुआ तो यहाँ पढ़ रहे करीब 2500 विद्यार्थियों का भविष्य अंधकार में घिर जायेगा।

मंत्रियों के गृह जिलों के शासकीय नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता नहीं 

एनएसयूआई ने इसे लेकर आपत्ति और आक्रोश जताया है, प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार के 13 मंत्रियों और कई भाजपा के दिग्गज नेताओं के गृह जिले और अपने निर्वाचन क्षेत्र के शासकीय नर्सिंग कॉलेज बंद होने की कगार पर हैं इनमें से कई कालेजों में प्राचार्य उप प्राचार्य तक नहीं हैं और कई कॉलेज में मात्र एक या दो फैकल्टी हैं जो नियमों का खुला उल्लंघन है।

प्राइवेट नर्सिंग कॉलेजों को मुनाफे पहुंचाने सांठ-गांठ के आरोप 

रवि परमार ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि शासकीय नर्सिंग कॉलेजों की कमियों को लेकर एनएसयूआईं द्वारा की गई शिकायतों को गंभीरता से लिया होता तो आज यह स्थिति नहीं होती, उन्होंने कहा सरकार की लापरवाही के कारण हजारों गरीब परिवार के विद्यार्थी नर्सिंग कॉलेजों में प्रवेश से वंचित रह जायेंगे क्योंकि वो प्राइवेट कालेजों की फीस भरने में सक्षम नहीं हैं, उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें प्राइवेट नर्सिंग कॉलेजों को मुनाफे पहुंचाने के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों की सांठ-गांठ दिखाई देती हैं।

एनएसयूआई ने की जाँच और कार्रवाई की मांग 

  • सभी शासकीय नर्सिंग कॉलेजों की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच करवाकर तत्काल कार्रवाई की जाए।
  • फर्जी नियुक्तियों और अनुभव प्रमाण पत्रों लगाने वाली फैकल्टियों पर एफआईआर हो।
  •  नर्सिंग शिक्षा बचाने हेतु कड़े और पारदर्शी कदम उठाए जाएं।
  •  शासकीय नर्सिंग कालेजों के बिगड़ते हालातों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल कार्यवाही कर उनका वेतन रोका जाएं
  • एन‌एसयूआई ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस गंभीर विषय पर कार्रवाई नहीं की तो छात्रहितों की रक्षा हेतु प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा ।

मान्यता से वंचित शासकीय नर्सिंग कॉलेज, मंत्री/नेता के नाम

  • शासकीय नर्सिंग कॉलेज रायसेन – प्राचार्य, उप प्राचार्य एवं असिस्टेंट प्रोफेसर नहीं। शिक्षण कार्य बिना अकादमिक संरचना। गृह जिला – नरेंद्र शिवाजी पटेल, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री
  •  शासकीय कॉलेज ऑफ नर्सिंग मंदसौर – केवल 5 फैकल्टी कार्यरत। एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, ट्यूटर नहीं। गृह जिला – जगदीश देवड़ा, वित्त मंत्री/उप मुख्यमंत्री
  •  शासकीय कॉलेज ऑफ नर्सिंग नरसिंहपुर – उप प्राचार्य, एसोसिएट व असिस्टेंट प्रोफेसर का अभाव। गृह जिला – प्रहलाद पटेल, पंचायत एवं ग्राम विकास मंत्री 
  • शासकीय ऑटोनॉमस आयुर्वेद कॉलेज जबलपुर – केवल 2 फैकल्टी कार्यरत, प्राचार्य व अन्य पद रिक्त। गृह जिला-राकेश सिंह, लोक निर्माण विभाग मंत्री
  •  शासकीय जीएनएम स्कूल राजगढ़ – प्राचार्य, उप प्राचार्य और असिस्टेंट प्रोफेसर का पद रिक्त। गृह जिला-नारायण सिंह पंवार, मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्यमंत्री और गोतम टेटवाल, कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री
  • शासकीय कॉलेज ऑफ नर्सिंग बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर – उप-प्राचार्य व प्रोफेसर/असिस्टेंट प्रोफेसर का अभाव, फिर भी MSc नर्सिंग की 35 सीटों के लिए आवेदन। गृह जिला- गोविंद सिंह राजपूत, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री
  •  स्कूल ऑफ नर्सिंग खंडवा – प्राचार्य, उप प्राचार्य एवं असिस्टेंट प्रोफेसर नहीं। शिक्षण कार्य बिना अकादमिक संरचना। गृह जिला – विजय शाह, जनजातीय कार्य व भोपाल गैस राहत मंत्री
  • डिपार्टमेंट ऑफ नर्सिंग, इंदिरा गांधी नेशनल ट्राइबल यूनिवर्सिटी अमरकंटक – 50 सीटों पर केवल 1 फैकल्टी कार्यरत, अकादमिक संरचना शून्य। गृह जिला – दिलीप जायसवाल, कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री
  • पंडित खुशीलाल शर्मा शासकीय ऑटोनॉमस आयुर्वेदा कॉलेज भोपाल – प्राचार्य का अभाव, फैकल्टी नियुक्तियों में गड़बड़ी, अनुभव प्रमाण पत्र फर्जी। गृह जिला- विश्वास सारंग, सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण विभाग  मंत्री और कृष्णा गौर, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री
  •  शासकीय जीएनएम स्कूल झाबुआ – प्राचार्य, उप प्राचार्य और असिस्टेंट प्रोफेसर पद रिक्त। गृह जिला – निर्मला भूरिया, महिला एवं बाल विकास मंत्री
  •  शासकीय जीएनएम स्कूल सीधी – प्राचार्य, उप प्राचार्य और असिस्टेंट प्रोफेसर पद रिक्त। ग्रह जिला- रीति पाठक, विधायक एवं पूर्व सांसद
  •  स्कूल ऑफ नर्सिंग दतिया – प्राचार्य, एसोसिएट व असिस्टेंट प्रोफेसर नहीं, संस्थान बिना अकादमिक संरचना संचालित। गृह जिला – नरोत्तम मिश्रा, पूर्व मंत्री
Atul Saxena
लेखक के बारे में
Atul Saxena

पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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