मध्यप्रदेश में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल को लेकर कमलनाथ ने सरकार को घेरा, उपेक्षा का आरोप, कहा ‘तुरंत निकालें समाधान’

पूर्व मुख्यमंत्री कहा कि अगर समय रहते अगर जूनियर डॉक्टरों की मांगों पर ध्यान दिया जाता तो स्वास्थ्य सेवाओं का इतना बड़ा संकट पैदा नहीं होता। उन्होंने सरकार से डॉक्टरों से संवाद कर जल्द समाधान निकालने की मांग की है ताकि मरीजों को हो रही परेशानियां खत्म हो सकें।
Madhya Pradesh Farmers

Kamal Nath

मध्यप्रदेश में लगभग 8 हजार जूनियर डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गए हैं जिस कारण अस्पतालों की ओपीडी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। इसे लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था पहले से ही कमजोर स्थिति में है और ऐसे में डॉक्टरों की हड़ताल से हालात और गंभीर हो गई हैं।

उन्होंने कहा कि एमपी सरकार ने जूनियर डॉक्टर्स की मांग पर समय रहते कोई ध्यान नहीं दिया और उन्हें न्याय देने के बजाय उनसे किसी तरह का कारगर संवाद नहीं किया। कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर समय रहते डॉक्टरों कीं न्यायोचित मांगें मान ली जातीं तो प्रदेश में आम आदमी के सामने उपचार का इतना बड़ा संकट खड़ा नहीं होता। उन्होंने सरकार से इस मामले में तुरंत समाधान निकालने की मांग की है।

मध्यप्रदेश में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल

मध्यप्रदेश में स्टाइपेंड संशोधन की मांग को लेकर सरकारी मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टरों ने सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। लंबे समय से लंबित पड़ी इस मांग को लेकर डॉक्टरों में असंतोष बढ़ता जा रहा था, जिसके बाद जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने सामूहिक रूप से आंदोलन का रास्ता अपनाया है। रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि सरकार ने स्टाइपेंड बढ़ाने और संशोधन को लेकर कई बार आश्वासन दिया, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

कमलनाथ ने सरकार को घेरा 

इसे लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं पहले से ही लचर हालत में हैं। ऐसे में जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने से स्थिति और अधिक चिंताजनक हो गई है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते डॉक्टरों की न्यायोचित मांगों पर ध्यान दिया जाता तो प्रदेश के आम लोगों के सामने इलाज का इतना बड़ा संकट खड़ा नहीं होता। कांग्रेस नेता ने सरकार से मांग की है कि जूनियर डॉक्टर्स की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर और इस मामले का तुरंत समाधान खोजें ताकि हड़ताल खत्म हो और आम आदमी को इलाज कराने में आ रही दिक्कतें समाप्त हो सकें।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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