कोरोना के बढ़ते ग्राफ के बीच ‘टोटल लॉकडाउन’ की खबरें वायरल, सरकार ने बताया अफवाह

कोरोना के बढ़ते ग्राफ के बीच ‘टोटल लॉकडाउन’ की खबरें वायरल, सरकार ने बताया अफवाह

भोपाल| मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में कोरोना (Corona) के बढ़ते संक्रमण से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है| प्रदेश में मंगलवार को एक दिन में अब तक के सबसे ज्यादा 798 कोरोना संक्रमित मिलने से हड़कंप मचा हुआ है| इस बीच सोशल मीडिया पर प्रदेश में संपूर्ण लॉकडाउन (Total Lockdown) लगाए जाने की खबरे वायरल हो रही हैं| हालाँकि सरकार इन ख़बरों को अफवाह बताते हुए ऐसे किसी फैसले से इंकार किया है|

सरकार के जनसम्पर्क विभाग और ऑफिस ऑफ़ शिवराज के ट्विटर हैंडल पर ट्वीट कर लॉकडाउन के सम्बन्ध में जानकारी दी गई है| जिसमे कहा गया है कि ‘प्रदेश में कल से संपूर्ण लॉकडाउन लगने संबंधित सोशल मीडिया में वायरल ख़बर पूर्णतः अफवाह है। प्रदेश में लॉकडाउन लगाने को लेकर शासन द्वारा कोई निर्णय नहीं लिया गया है’।

गृहमंत्री ने कहा लॉकडाउन का कोई प्लान नहीं
इससे पहले मंगलवार को गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने साफ कहा है कि फ़िलहाल लॉकडाउन को लेकर कोई प्लानिंग नहीं है, मप्र में स्थाई लॉकडाउन को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं है। अफवाहों पर ध्यान ना दे। उन्होंने मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि लॉकडाउन को लेकर कोई भी प्रस्ताव शासन स्तर पर लंबित नहीं है, स्थानीय स्तर पर क्राईसिस मैनेजमेंट कमेटी की अनुशंसा पर आगे कोई फैसला लिया जाएगा। फ़िलहाल लॉकडाउन को लेकर कोई प्लानिंग नहीं है, मप्र में स्थाई लॉकडाउन को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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