मप्र जनसंपर्क संचालक ओपी श्रीवास्तव की किताब का जबलपुर में होगा विमोचन

मप्र जनसंपर्क संचालक ओपी श्रीवास्तव की किताब का जबलपुर में होगा विमोचन

भोपाल। अध्यात्म में रचे बसे व्याख्याकार भारती एवं ओमप्रकाश श्रीवास्तव रचित ग्रंथ (श्रीराम चरित मानस पर आधारित) शब्दमानस का विमोचन 29 जनवरी को प्रात: 9 बजे रामायण कान्फें्रस में संत शिरोमणि मानस मर्मज्ञ मोरारी बापू करेंगे।

उल्लेखनीय है कि ग्रंथ के रचनाकार ओमप्रकाश श्रीवास्तव भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं। श्री श्रीवास्तव मध्यप्रदेश के अनेक जिलों में विभिन्न प्रशासनिक पदों पर पदस्थ रहे हैं । वर्ममान में जनसम्पर्क विभाग में संचालक हैं। भारती श्रीवास्तव विगत 28 वर्षों से शिक्षा जगत से सम्बद्ध हैं । वर्तमान में सहायक संचालक के रूप में आयुक्त लोक शिक्षण कार्यालय भोपाल में पदस्थ हैं।
क्या विशिष्टता है ग्रंथ की-

शब्दमानस ग्रंथ शब्दों का मानसरोवर है । इसमें शब्द भी वह हैं जिनसे गोस्वामी तुलसीदास ने शिवजी के अंत:करण में रची गई श्री रामचरित मानस को लिपिबद्ध किया। इन शब्दों को वर्णमाला के क्रम से क्रमबद्ध करके, उनके समस्त संदर्भों को एक साथ रखकर, उनके विभिन्न अर्थों को लिपिबद्ध करके शब्द मानस की रचना की गयी है । इस ग्रंथ में श्री रामचरित मानस के समस्त 14 हजार 611 शब्दों के अर्थ, संदर्भ तथा उनसे संबंधित सम्पूर्ण चौपाई, दोहा, सोरठा, श्लोक, छंद एक ही स्थान पर उपलब्ध हैं । यह ग्रंथ श्रद्धालु, भक्त, शब्द साधक, विद्वान, भाषाविद, शोधार्थी, प्रवचनकर्ता, आलोचक सभी के लिये बेहद उपयोगी हैं । ग्रंथ के सम्बंध में जगतगुरू शंकराचार्य परमपू’य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा है कि काव्य की मर्यादा में विभिन्न अर्थों को नहीं बतलाया जा सकता, इसे उसके आनुषंगिक कोश ग्रंथों से ही जाना जाता है। भारती और ओम प्रकाश द्वारा सुदीर्घ काल में परिश्रमपूर्वक रामचरित मानस पर लिखा गया शब्द मानस निश्चित ही मानस प्रेमियों को आनन्दित करेगा।

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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