शिक्षक भर्ती में पदवृद्धि की मांग: 10 दिन से आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने खून से लिखा पत्र, CM और शिक्षा मंत्री से लगाई गुहार

भोपाल के नीलम पार्क में वर्ग-2 और वर्ग-3 शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने की मांग को लेकर दस दिन से जारी है आंदोलन, धरना और अनशन के बाद अभ्यर्थियों ने अपनाया विरोध का नया तरीका; खून से पत्र लिखकर मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मांगा हस्तक्षेप
शिक्षक भर्ती में पदवृद्धि की मांग

भोपाल। मध्य प्रदेश में वर्ग-2 और वर्ग-3 शिक्षक भर्ती में पदवृद्धि की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब दसवें दिन में पहुंच गया है। भोपाल में लगातार प्रदर्शन के बावजूद मांग पर कोई फैसला नहीं होने से नाराज अभ्यर्थियों ने रविवार को अपने खून से पत्र लिखकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और शिक्षा मंत्री से पद बढ़ाने की गुहार लगाई।

अभ्यर्थियों का कहना है कि वे पिछले 10 दिनों से सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी मांग पर कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। ऐसे में रविवार को प्रदर्शनकारियों ने विरोध का अलग तरीका अपनाया। अभ्यर्थियों ने खून से पत्र लिखा और इसके जरिए वर्ग-2 एवं वर्ग-3 शिक्षक भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग सरकार के सामने रखी।

नीलम पार्क में लगातार चल रहा आंदोलन

पदवृद्धि की मांग को लेकर अभ्यर्थी भोपाल के नीलम पार्क में डटे हुए हैं। आंदोलन के दौरान धरना-प्रदर्शन के साथ अभ्यर्थियों ने अनशन का रास्ता भी अपनाया है। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पदों की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि अधिक पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर मिल सके।

बीते दिनों आंदोलन के दौरान पांच दिन से निर्जल अनशन कर रहे अभ्यर्थी नरेंद्र राजपूत की तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद पुलिस उन्हें अस्पताल लेकर गई थी। इसके बाद भूख हड़ताल पर बैठी एक महिला अभ्यर्थी भी बेहोश हो गई थी और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।

आंदोलन के दसवें दिन खून से लिखी अपनी मांग

लगातार धरना और अनशन के बाद अब खून से पत्र लिखना अभ्यर्थियों के आंदोलन का नया कदम है। मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम लिखे गए पत्र में उन्होंने वर्ग-2 और वर्ग-3 में पदवृद्धि की मांग रखी है। अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार उनकी बात सुने और भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाने पर जल्द निर्णय ले।

फिलहाल आंदोलन जारी है और सरकार की ओर से पदवृद्धि को लेकर किसी नए निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में दस दिनों से भोपाल में डटे अभ्यर्थियों की नजर अब सरकार के रुख पर है।

Bhawna Choubey
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