
Umang Singhar
मध्यप्रदेश में श्रमिकों की मौत के आंकड़ों को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर हमला बोला है। उमंग सिंघार ने कहा कि प्रदेश में एक साल के दौरान लगभग 69 हजार श्रमिकों की मौत हुई है। उन्होंने इस आंकड़े को “दिल दहला देने वाला” बताते हुए राज्य सरकार पर मजदूरों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही का आरोप लगाया है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा दो दशकों से सत्ता में बैठी भाजपा सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है लेकिन हकीकत यह है कि प्रदेश का मेहनतकश मजदूर असुरक्षित काम, खराब स्वास्थ्य सुविधाओं और सरकारी लापरवाही के बीच अपनी जान गंवा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या मध्यप्रदेश में मजदूरों का जीवन इतना सस्ता हो गया है।
उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा
उमंग सिंघार ने मध्यप्रदेश में श्रमिकों की मौत के बढ़ते आंकड़ों पर गंभीर चिंता जताई है। मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से उन्होंने कहा कि कि प्रदेश में एक साल में 69 हजार श्रमिकों की मौत हुई है जो रोजाना औसतन लगभग 190 मौत के बराबर है। पंजीकृत श्रमिकों में बड़ी संख्या में सामान्य और दुर्घटनाजनित मौतें दर्ज हुई हैं। पिछले वर्ष लगभग 57 हजार सामान्य मौतें और लगभग 5800 दुर्घटनाजनित मौतें दर्ज की गई थीं, जिससे कुल संख्या 60 हजार से अधिक हो जाती है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है।
श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह सिर्फ संख्या नहीं बल्कि हजारों परिवारों के टूटे सपनों और अनाथ हुए बच्चों की कहानी है। उन्होंने कहा कि दो दशकों से सत्ता में बैठी भाजपा सरकार विकास के बड़े दावे करती है लेकिन वास्तविकता यह है कि प्रदेश का मेहनतकश वर्ग असुरक्षित कामकाजी परिस्थितियों, कमजोर स्वास्थ्य सुविधाओं और सरकारी उदासीनता के बीच जीवन गुजार रहा है। कांग्रेस नेता ने सरकार से सवाल किया कि क्या मध्यप्रदेश में मजदूरों की जिंदगी इतनी सस्ती हो गई है कि उनकी मौतें महज आंकड़ों में बदल कर रह जाएं। उन्होंने कहा है कि राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि श्रमिकों के लिए सुरक्षित कार्यस्थल, स्वास्थ्य सुविधाएं और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करे।
69 हजार श्रमिकों की मौत की खबर दिल दहला देने वाली है!
मध्यप्रदेश में एक ही साल में 69 हजार श्रमिकों की मौत हो गई, यानी हर दिन लगभग 190 मजदूर अपनी जान गंवा रहे हैं।
ये सिर्फ आंकड़े नहीं हैं… ये 69 हजार परिवारों के टूटे हुए सपने, उजड़े घर और अनाथ हुए बच्चों की कहानी है।दो… pic.twitter.com/wTD2WcBA7l
— Umang Singhar (@UmangSinghar) March 6, 2026
पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

