अब कांग्रेस गई तो 25 साल नही आएगी, पुत्र मोह में पूरी कांग्रेस बर्बाद: नरोत्तम

अब कांग्रेस गई तो 25 साल नही आएगी, पुत्र मोह में पूरी कांग्रेस बर्बाद: नरोत्तम

भोपाल।

पूर्व मंत्री और बीजेपी विधायक नरोत्तम मिश्रा का बड़ा बयान सामने आया है। मिश्रा का कहना है कि एक करोना पूरे विश्व को मार रहा है वही एमपी में कोरोना कमलनाथ सरकार को बचा रहा। ये कहते है कि हमारे पास बहुमत है तो आप राज्यपाल के सामने ही अपने विधायकों की परेड करवा दे।सत्ता की लोलुपता इन्हें कितनी है ये देखने को मिलता। ये संविधान का बार बार उलंघन कर रहे है।पुत्र मोह में एक मां ने देश से कांग्रेस साफ कर दी। वही दिग्विजय और कमलनाथ ने पुत्रों के मोह में राजा-महाराजा को लड़वा दिया।पहले 15 साल का वनवास था अब जाएगी तो 25 साल नही आएगी। पीढ़िया बदल जाएगी। एमपी में भी इन्होंने कांग्रेस को खत्म कर दिया।

दिग्विजय सिंह के बैंगलुरु में उपवास पर कहा दिग्विजय अगर किसानों के कर्ज माफी ,बेरोजगारों को रोजगार भत्ता, प्रदेश में हो रहे ट्रांसफर पोस्टिंग के विरोध में बैठते तो शायद अच्छा होता। संविधान की हत्या करने वाले संविधान की बात करेंगें तो अच्छा नही।मिश्रा ने कहा कि दिग्विजय का स्वभाव है, ऐसा करना । आज मुकेश नायक ने भी इस पूरे हालात के लिए दिग्विजय को जिम्मेदार ठहराया है। दिग्विजय की पार्टी के लोग ही कह रहे हैं कि सबसे बड़ा ब्लैकमेलर और माफिया कौन है।22 विधायकों ने खुद कहा कि ये सारा करा धरा दिग्विजय सिंह का है। कभी देशहित के मुद्दों के लिए ये आपको लड़ते नही मिले होंगे, हमेशा साम्प्रदायिक मुद्दे पर सुर्खियाें बटोरना इनका काम है।

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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