नरोत्तम का कमलनाथ पर तंज- “कभी जनता के दिल में उतर कर भी देखें”

नरोत्तम का कमलनाथ पर तंज- “कभी जनता के दिल में उतर कर भी देखें”

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट

गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ पर तंज करते हुए कहा कि सड़क पर उतरने की बजाय वे कभी जनता के दिल में उतर कर भी देखें। इसी के साथ उन्होने कहा कि कमलनाथ को तो सड़क शब्द से परहेज करना चाहिए, क्योंकि जब उन्होने ज्योतिरादित्य सिंधिया को सड़क पर उतरने को कहा था तो उसके बाद पूरी सरकार और कांग्रेस की सड़क पर आ गई।

बता दें कि कमलनाथ की विदेश की राजनीति और सड़क पर उतरने के बयान पर गृह मंत्री प्रतिक्रिया दे रहे थे। नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि कमलनाथ सड़क पर उतरने की बात कर रहे हैं, कभी जनता के दिल मे उतरने की बात करें और देखें कि छिंदवाड़ा के बाहर भी संसार है। उन्होने पूछा कि जिस पूर्व मंत्री पर प्रकरण दर्ज हुआ है क्या वो झूठा है, क्या एक भी कांग्रेस के कार्यकर्ता है जिस पर झूठे प्रकरण दर्ज हुए हैं। नरोत्तम ने कहा कि मुझसे पूछो कैसे झूठे प्रकरण लगाए जाते हैं, मैं इसका चश्मदीद हूं, 15 महीने पर आपके द्वारा कैसे झूठे प्रकरण लगाए गए थे। वहीं कांग्रेस के रोजगार अभियान पर गृहमंत्री ने तंज कसते हुुए कहा कि कांग्रेस उठाये रोजगार के मुद्दे, लेकिन कांग्रेस ये बताए कि 15 महीनों में क्या किसी एक को भी रोजगार दिया है ? कांग्रेस के घोषणा पत्र में था, रोजागर देने का उसका क्या हुआ ? कांग्रेस के घोषणा पत्र में था डीजल के दाम कम करेगे, रोजागर देगे, नोजवानो को भत्ता देगे ? लेकिन वो सब कोरी बातें थी और कमलनाथ अब बीजेपी पर सवाल उठाकर अपनी कमियों को छिपाना चाहते हैं।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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