नरोत्तम का वार-‘कांग्रेस बन चुकी है धक्का गाड़ी, बिना धक्के के चलना मुश्किल’

नरोत्तम का वार-‘कांग्रेस बन चुकी है धक्का गाड़ी, बिना धक्के के चलना मुश्किल’

भोपाल।

मध्यप्रदेश (madhypradesh) में उपचुनाव(by election) से पहले सियासी गलियारों में बयानबाजी का दौर तेजी से चल रहा है।अब गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा (home minister narottam mishra) ने कांग्रेस द्वारा प्रशांत किशोर को उपचुनाव की जिम्मेदारी देने पर बड़ा बयान दिया है। मिश्रा का कहना है कि धक्का प्लेट गाड़ी है, सेल्फ स्टार्ट होने की कोशिश कर रही है।अब सेल्फ स्टार्ट होने होने के लिए किसी की मदद तो लेगी है। मिश्रा ने आगे कहा कि उपचुनाव के लिए कांग्रेस ब्राम्हण चेहरा खोज रही है।इसके पास कोई चेहरा ही नहीं है, तो ब्राम्हाण चेहरा कहां से मिलेगा।

वही संविधान से इंडिया शब्द हटाकर सिर्फ भारत करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई याचिका का गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने समर्थन किया।उन्होंने कहा कि भारत से आत्मीयता का आभास होता है। भारत हमारी जननी जन्मभूमि है, मैं इसका पूरा समर्थन करता हूं और इसमें बदलाव होना चाहिए।

अभियान चलाएगी बीजेपी

अभियान को लेकर गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि कोरोना को लेकर बीजेपी जागरूकता अभियान चलाएगी ।जागरूकता अभियान में एनसीसी,एनएसएस, जन अभियान परिषद, ओर कम्युनिटी लीडर्स शामिल होंगे। एक ऐसी फ़ौज तैयार हो जो लोगों को कोरोना वाइरस से बचाव के सभी उपायों की सरल तरीको से जानकारी दे जायेगी।प्रदेश सरकार पूरे जून माह में जागरूकता अभियान चलाएगी।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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