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राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस: सीएम मोहन यादव ने दी शुभकामनाएं, जानिए तिरंगे का गौरवशाली इतिहास

ये दिन हमें यह याद दिलाता है कि तिरंगा सिर्फ एक राष्ट्रीय ध्वज नहीं बल्कि लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान, भारत की विविधता में एकता, लोकतांत्रिक मूल्यों, राष्ट्रीय स्वाभिमान और निरंतर प्रगति का जीवंत प्रतीक है। यह देशवासियों में राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करने के साथ-साथ संविधान और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर भी है।
Tiranga

हमारा देश आज राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस मना रहा है। 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में तिरंगे को आधिकारिक मान्यता दी थी। यह ऐतिहासिक निर्णय देश की स्वतंत्रता से 24 दिन पहले लिया गया था। इसके बाद 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र भारत के रूप में पहली बार यही तिरंगा आधिकारिक रूप से फहराया गया और तब से यह देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता का प्रतीक बना हुआ है।

सीएम मोहन यादव ने इस दिन की बधाई दी है। उन्होंने कहा कि “राष्ट्रीय झंडा अंगीकरण दिवस की समस्त देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। तिरंगा हमारी एकता, अखंडता, स्वाभिमान और राष्ट्रगौरव का प्रतीक है। आइए, इसके सम्मान और राष्ट्रसेवा के अपने संकल्प को सदैव सुदृढ़ बनाए रखें।”

राष्ट्रीय झंडा अंगीकरण दिवस

आज हमारा राष्ट्रीय झंडा अंगीकरण दिवस है। हर वर्ष 22 जुलाई को भारत इस दिन को सम्मानित करता है, जब 1947 में संविधान सभा ने देश के राष्ट्रीय ध्वज ‘तिरंगे’ को उसके वर्तमान स्वरूप में अंगीकार किया था। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज की डिजाइन पिंगली वेंकय्या ने तैयार की थी। 1923 में उन्होंने शुरुआती डिजाइन प्रस्तुत किया, जिसमें सिर्फ दो रंग थे लाल जो हिंदू समुदाय का प्रतीक था और हरा रंग जो मुस्लिम समाज का प्रतीक था। इसके बाद महात्मा गांधी के सुझाव पर सफेद पट्टी जोड़ी गई, जो शांति और अन्य समुदायों का प्रतीक बनी। साथ ही चरखा भी शामिल किया गया, जो आत्मनिर्भरता का संदेश देता था।

संविधान सभा ने दी थी मान्यता

22 जुलाई 1947 को संविधान सभा की बैठक में जवाहरलाल नेहरू ने प्रस्ताव पेश किया। बैठक की अध्यक्षता डॉ. राजेंद्र प्रसाद कर रहे थे। इस प्रस्ताव में ध्वज को क्षैतिज तिरंगे के रूप में वर्णित किया गया। तिरंगे में ऊपर गहरा केसरिया, बीच में सफेद और नीचे गहरा हरा, जिसमें सफेद पट्टी के केंद्र में नौसेना नीले रंग का अशोक चक्र है। चरखे को अशोक चक्र से बदल दिया गया, जो सारनाथ के सिंह स्तंभ से प्रेरित है और धर्म, न्याय तथा निरंतर प्रगति का प्रतीक है। ये प्रस्ताव सर्वसम्मति से स्वीकार हुआ। इसके बाद 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता के दिन जवाहरलाल नेहरू ने लाल किले पर तिरंगे को फहराया।

राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और उसके उपयोग से जुड़े नियम भारतीय ध्वज संहिता (फ्लैग कोड ऑफ इंडिया), 2002 के तहत निर्धारित किए गए हैं। वर्ष 2022 में इसमें संशोधन के बाद नागरिकों को निर्धारित नियमों के अनुसार दिन और रात दोनों समय राष्ट्रीय ध्वज फहराने की अनुमति दी गई। राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस उन स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को भी याद करने का अवसर है जिन्होंने आजादी के आंदोलन के दौरान तिरंगे को राष्ट्रीय स्वाभिमान और स्वतंत्रता के प्रतीक के रूप में स्थापित किया।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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