11 अप्रैल इंस्टा पर लाइव होंगी जुड़वा बहनें नव्या-भव्या, इन मुद्दों पर रखेंगी अपनी बात

11 अप्रैल इंस्टा पर लाइव होंगी जुड़वा बहनें नव्या-भव्या, इन मुद्दों पर रखेंगी अपनी बात

भोपाल।
लॉकडाउन के दौरान अपनी सोच को सकारात्मक रखने के लिये कला और साहित्य से बेहतर कोई माध्यम नहीं। किताबों में हमें जीवन दर्शन, कथा कहानी, कविता से लेकर जीवन को दिशा देने वाली प्रेरणा मिलती है, और इस समय सही प्रेरणा की बहुत जरूरत है। तो ऐसे ही कठिन समय मे सोशल डिस्टेंसिंग को देखते हुए भोपाल का मंजूल प्रकाशन आपके लिए एक खास साहित्यक दो दिवसीय उत्सव ला रहा है। ऑनलाइन लिटरेरी फेस्ट नाम के इस उत्सव में जहां आप अपने पसंदीदा लेखकों से मिल सकते हैं और उनसे अपने घर के क्षेत्रों से बात कर सकते हैं।खास बात ये है कि इसमें मंदसौर-नीमच के एसपी रहे मनोजकुमार सिंह की जुड़वा बेटियों और आपकी पसंदीदा भव्या और नव्या भी आपसे रुबरु होंगी, जो आपसे थर्ड जेंडर ,क्लाइमेट चेंज एवं आदि विषयों पर चर्चा करेंगी। बता दे कि नव्या-भव्या इससे पहले कई सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय रख चुकी है और लोगों को जागरुक कर चुकी है।

दरअसल, नव्या सिंह और भव्या सिंह जो मात्र 12 वर्ष की हैं उनके द्वारा यह पुस्तक ‘पोस्ट मिलेनीयल टेल्ज़’ लिखी गई है ।पुस्तक के कथानक भव्या चित्रण नव्या द्वारा किया गया है। इन कहानियों की विषय वस्तु विविध हैं इनमें थर्ड जेंडर ,क्लाइमेट चेंज एवं आदि विषयों पर चर्चा की गई है। इस पुस्तक में कुल ऐसी 50 कहानियां हैं जिसे मंजुल के एमरेलीस प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया गया है। अनुसंधान ने यह साबित किया है कि-पोस्ट-मिलेनियल ’पीढ़ी अपनी सामाजिक चेतना में अद्वितीय है, और अब तक की सबसे नस्लीय और जातीय रूप से विविध पीढ़ी है।

गौरतलब है कि पुलिस कमांडेंट 25 वीं बटालियन के अफसर मनोज सिंह की बेटी नव्या और भव्या पहले भी कई सामाजिक मुद्दों को उठा चुकी है। इससे पहले उन्होंने बच्चों को घटित हो रहे यौन अपराधों , गुड टच और बेड टच के बारे में लोगों को जागरुक किया था। उन्होंने वर्ल्ड पीरियड वीक को लेकर बनाए वीडियो में बालिकाओं-युवतियों को परिवार में खुलकर चर्चा करने की भी जरूरत बताई थी। हाल ही उन्होंने दिवाली पर यूट्यूब चैनल के माध्यम से वीडियो के साथ सुरक्षा का संदेश दिया था। वह पर्यावरण को बचाने का भी संदेश अपने वीडियो के जरिए दे चुकी हैं। यू-ट्यूब पर इन बहनों का एक चैनल भी है जिसके माध्यम से ये समाज को जागरुक करने का काम कर रही है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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