मध्य प्रदेश वासियों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश में अब नया घर, मकान, दुकान या कोई भी निर्माण कराना आसान होने वाला है। राज्य की मोहन सरकार बिल्डिंग परमिशन के लिए सरकार अब नजूल एनओसी की अनिवार्यता खत्म करने जा रही है। इस संबंध में बुधवार,14 अक्टूबर को नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने मध्य प्रदेश भूमि विकास नियम, 2012 में संशोधन का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है।
फिलहाल प्रस्तावित संशोधन पर 15 दिनों के भीतर आम लोगों से दावे आपत्ति और सुझाव मांगे गए हैं। इसके बाद इन दावे-आपत्ति और सुझावों पर विचार कर संशोधन को लागू किया जाएगा।संशोधन लागू होने के बाद ही नई व्यवस्था प्रभावी होगी। इसके बाद भवन निर्माण का नक्शा पास कराने के लिए नजूल एनओसी की सर्टिफाइड कॉपी लगाने की अनिवार्यता खत्म हो जाएगी।
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दरअसल, वर्तमान में ‘मप्र भूमि विकास नियम 2012’ के नियम 16(11) के प्रावधानों के तहत निर्माण अनुमति के आवेदन के साथ भू-स्वामित्व प्रमाणित करने वाले 3 दस्तावेज अनिवार्य रूप से देने होते हैं। इनमें विक्रय विलेख या पट्टा विलेख (रजिस्ट्री), खसरा-नक्शा और खतौनी अभिलेख के साथ नजूल एनओसी की प्रमाणित प्रति शामिल है। संशोधन प्रस्ताव के ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के मुताबिक, नियम 16 के उपनियम (11) के खंड (ग) को पूरी तरह से विलोपित (हटाया) किया जाएगा, जबकि खंड (क) और (ख) यथावत बने रहेंगे। इस बदलाव के बाद अब आवेदकों को आवेदन के साथ केवल रजिस्ट्री/पट्टा और खसरा, खतौनी-नक्शा ही लगाना होगा।
