चरनोई की भूमि को बंजर बताकर स्वराज शूटिंग्स को कर दी आवंटित, वहां खड़े हैं दो हजार से ज्यादा वृक्ष, हाई कोर्ट पहुंचा मामला

नीमच के वन विभाग द्वारा इस जमीन को लेकर एक रिपोर्ट दी गई। यह रिपोर्ट मौके पर जाकर वन कर्मियों ने तैयार की और बताया कि जमीन पर 2370 वृक्ष सागवान, आंवला और नीम के हैं जो जीवित अवस्था में है, साथ ही 55 वृक्ष जमीन पर गिरे पड़े पाए गए , जो ठूंठ बन गए थे।
Land Allotment for 'Swaraj' Shootings in Neemuch

Land Allotment for ‘Swaraj’ Shootings in Neemuch

नीमच जिला प्रशासन ने चरनोई की भूमि को बंजर बता राजस्थान के उद्योगपति को फैक्ट्री विस्तार के लिए आवंटित कर दी, एक पर्यावरण प्रेमी ने इसके खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका लगाई तो खुलासा हुआ कि उस जमीन पर दो हजार से ज्यादा वृक्ष खड़े हैं।
खुलासे में सामने आया कि ग्राम सोनियाना में जो जमीन को स्वराज शूटिंग्स को आवंटित की गई थी वह चरनोई की जमीन है और इसी जमीन को सरकारी टीम ने सांठ गांठ कर, दस्तावेजों में हेरफेर कर बंजर और अनुपयोगी बताया।  मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद  स्वराज शूटिंग्स को मिलने वाली जमीन का मामला अटक गया है।

नीमच जिले के धामनिया-झंझावाड़ा औद्योगिक पार्क में भीलवाड़ा के उद्योगपति मोहम्मद साबिर खान की कंपनी स्वराज शूटिंग्स को फैक्टरी विस्तार के लिए ग्राम सोनियाना में 52 बीघा जमीन आवंटित की गई थी। यह आवंटन वर्ष 2021-22 में तत्कालीन कलेक्टर मयंक अग्रवाल ने किया था। ग्राम सोनियाना में जिस जमीन को आवंटित किया गया, पटवारी और तहसीलदार की टीम ने बंजर और अनुपयोगी बताया था जबकि जमीन चरनोई की है, जो खनन जमीन के बदले वृक्ष लगाने के लिए दी गई थी।

जिस जमीन को प्रशासन ने बंजर बताया वहां खड़े 2 हजार से ज्यादा पेड़ 

यह खुलासा हुआ है पर्यावरण प्रेमी जितेंद्र मेघवाल के प्रयासों से। ग्राम जमुनिया कला के जितेंद्र मेघवाल द्वारा सोनियाना में चरनोई की जमीन पर स्वराज शूटिंग्स कंपनी द्वारा अंधाधुंध तरीके से वृक्ष काटे जाने का विरोध किया ओर इसकी शिकायत प्रशासनिक अधिकारियों को की गई लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो हजारों हरे-भरे वृक्षों को बचाने लिए जितेंद्र मेघवाल ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई साथ एनजीटी में भी शिकायत की गई। हाई कोर्ट में सुनवाई के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ और पता चला कि जिस जमीन को प्रशासन की टीम ने बंजर बताया था वहां दो हजार से ज्यादा वृक्ष मौजूद है और जमीन चरनोई की है। यह खुंलासा होने के बाद स्वराज शूटिंग्स को आवंटित जमीन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

पहले चरनोई की भूमि- फिर आवंटन कैसे

तत्कालीन कलेक्टर मयंक अग्रवाल ने दिनांक 30-5- 2022 को एमपीआईडीसी को आवंटित जमीन को चरनोई की बताते हुए आवंटन निरस्त करते हुए पुन: चरनोई की घोषित की गई। बाद में कलेक्टर मयंक अग्रवाल ने अपने आदेश को पलटते हुए 23-7- 2021 के आवंटन के आदेश को यथावत रखा।

वन विभाग की रिपोर्ट में हुआ खुलासा  

नीमच के वन विभाग द्वारा इस जमीन को लेकर एक रिपोर्ट दी गई। यह रिपोर्ट मौके पर जाकर वन कर्मियों ने तैयार की और बताया कि जमीन पर 2370 वृक्ष सागवान, आंवला और नीम के हैं जो जीवित अवस्था में है, साथ ही 55 वृक्ष जमीन पर गिरे पड़े पाए गए , जो ठूंठ बन गए थे। वन विभाग की रिपोर्ट बताती है कि यह जंगल की जमीन थी और इस जमीन पर दो हजार से ज्यादा जीवित वृक्ष है।

इन्होंने बताई बंजर जमीन- पेश की झूठी रिपोर्ट

वर्ष 2021 में जीरन की तत्कालीन तहसीलदार श्रद्धा त्रिवेदी, राजस्व निरीक्षक पंकज श्रीवास्तव, पटवारी, सीमा पंवार, संदेश चेलावत, हिमांशु तिवारी, सुनील कोरी और सोनियाना के तत्कालीन सरपंच-सचिव ने दिनांक 30-5-2022 को जमीन को बंजर और अनुपयोगी बताकर झूठी रिपोर्ट पेश की। इस मामले में याचिकाकर्ता जितेंद्र मेघवाल ने एफआईआर के लिए नीमच पुलिस अधीक्षक को आवेदन भी दिया है।

फैक्टरी को सौंप दी चरनोई की जमीन

पर्यावरण प्रेमी जितेंद्र मेघवाल का कहना है कि सोनियाना में खनन के बदले इस जमीन को चरनोई के लिए दिया गया था। हमने वहां दो से ढाई हजार पौधे लगाए जो वृक्ष बन गए हैं। वन विभाग ने भी रिपोर्ट वृक्ष होन की रिपोर्ट दी है। चरनोई की जमीन को कैसे स्वराज शुटिंग्स को दी गई। यह आवंटन है, हम हाई कोर्ट पहुंच गए हैं।

एमडी को किया मैसेज, जवाब नहीं आया 

जमीन आवंटन को लेकर स्वराज शुटिंग्स के मैनेजिंग डायरेक्टर मोहम्मद साबिर खान से संपर्क किया गया और उन्हें मैसेज पर पूरा विवरण भेजा गया लेकिन उन्होंने अपना पक्ष रखने के लिए कोई जवाब नहीं दिया।

कमलेश सारड़ा की रिपोर्ट 

Kamlesh Sarda
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