अंकपात-खाकचौक मार्ग पर होगा चौड़ीकरण, कई मंदिर जद में, पुजारियों ने मांगा दूसरा विकल्प

सिंहस्थ के कामों के बीच अंकपात से लेकर खाक चौक तक जाने वाला मार्ग चौड़ा किया जाने वाला है। इस मार्ग पर कई धार्मिक स्थल हैं। पुजारियों ने वैकल्पिक रास्ता निकालने की मांग की है।
Ujjain

उज्जैन में सिंहस्थ को लेकर सड़क चौड़ीकरण का काम तेजी से किया जा रहा है। अलग-अलग मार्गों पर रोड पहले से ज्यादा चौड़ी की जा रही है। इसकी जद में मकान और दुकान से लेकर धर्मस्थल भी आ रहे हैं। ऐसे ही अब अंकपात से खाक चौक की तरफ जाने वाले मार्ग को चौड़ा करने का फैसला लिया गया है। लेकिन अब पुजारी इसका विरोध कर रहे हैं।

इस पूरे मार्ग पर कई सारे पुराने को मंदिर मौजूद है। पहले से ही 45 फीट चौड़ा यह मार्ग 30 मीटर और चौड़ा करने की तैयारी की जा रही है। इसमें लगभग दो दर्जन से ज्यादा मंदिर भी आ रहे हैं। इसी को देखते हुए पुजारियों ने कहा है कि अगर धार्मिक स्थल ही नहीं रहेंगे तो सिंहस्थ किस काम का रहेगा। मांग ना माने जाने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।

ये मंदिर चौड़ीकरण की जद में

इस चौड़ीकरण की चपेट में उत्तरामुखी हनुमान मंदिर से लेकर, अविघ्न विनायक गणेश मंदिर, षट् विनायक, हांडीफोड भैरव, पुरुषोत्तम मंदिर, नर्मदेश्वर महादेव मंदिर, बृहस्पतेश्वर महादेव, राम मंदिर, अन्नपूर्णा माता मंदिर, वीर हनुमान, बड़ा राम मंदिर, श्री राम हनुमान मंदिर लक्ष्मण दास जी महाराज, राम मंदिर बलाई समाज धर्मशाला, लाल पत्थर का हनुमान मंदिर, गोपाल धाम, रविदास धाम सहित कई सारे मंदिर आ रहे हैं। इनमें से कुछ मंदिर ऐसे हैं जो बहुत ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं और अगर चौड़ीकरण किया जाता है तो केवल गर्भगृह बच पाएगा। वहीं कुछ मंदिरों का हिस्सा 6 से 7 मीटर तक प्रभावित हो रहा है। हालांकि अंतिम नपती और सीमांकन के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि कितना चौड़ीकरण होगा।

पुजारियों का क्या कहना

चौड़ीकरण की जद में आ रहे हैं मंदिरों के पुजारियों का कहना है कि  UDA और प्रशासन को मौके पर आकर संतों और पुजारी के साथ बैठक कर विचार विमर्श करना चाहिए। बातचीत के बाद सर्वसम्मति से जो निर्णय सामने आएगा वह उसमें सहयोग करेंगे। फिलहाल लाल निशान लगाए गए हैं और जल्द ही नोटिस भेजा जाएगा। पुजारियों का कहना है कि अगर बातचीत के दौरान समाधान नहीं निकलता है और मंदिरों को हटाने की कार्रवाई की जाती है तो आंदोलन किया जाएगा। सिंहस्थ के नाम पर प्राचीन मंदिरों का नुकसान स्वीकार नहीं किया जाएगा।

पहले भी हुआ चौड़ीकरण

बता दें कि साल 2004 में भी इस रोड को चौड़ा किया गया था। तब भी सिंहस्थ को लेकर किए गए काम के चलते कई मंदिर के हिस्से सड़क में चले गए थे। पुजारियों का कहना है कि वर्तमान में सड़क पर्याप्त रूप से चौड़ी है। अगर इसे और चौड़ा किया जाएगा तो मंदिरों के प्राचीन स्वरूप पर असर पड़ सकता है। धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को देखते हुए दूसरा विकल्प निकाला जाना चाहिए।

Diksha Bhanupriy
लेखक के बारे में
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